Global Wellness Summit फिट रहने के लिए डर्टी वेलनेस, मेंथल हेल्थ के लिए असरदार, दुनियाभर में ये ट्रेंड फॉलो कर रहे लोग

Khabarwala 24 News New Delhi : Global Wellness Summit दुनिया में नए ट्रेंड हमेशा चर्चा का विषय बनते हैं. फैशन से लेकर म्यूजिक और फिटनेस ट्रेंड तेजी से एक जगह से दूसरी जगह फॉलो किए जाते हैं। पिछले दिनों ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिला जिसे ‘डर्टी वेलनेस’ का नाम दिया गया है। फिट रहने […]

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Khabarwala 24 News New Delhi : Global Wellness Summit दुनिया में नए ट्रेंड हमेशा चर्चा का विषय बनते हैं. फैशन से लेकर म्यूजिक और फिटनेस ट्रेंड तेजी से एक जगह से दूसरी जगह फॉलो किए जाते हैं। पिछले दिनों ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिला जिसे ‘डर्टी वेलनेस’ का नाम दिया गया है। फिट रहने के लिए ‘बैक टू बेसिक’ की थीम पर आधारित ये ट्रेंड काफी आकर्षक है और लोग फिट रहने के लिए इसे डेली रुटीन का हिस्सा बना रहे हैं। खास तौर पर मेंथल हेल्थ के लिए ये काफी असरदार माना जा रहा है।

प्रकृति के करीब आने का मौका (Global Wellness Summit)

ग्लोबल वेलनेस समिट के मुताबिक साल 2022 में ‘डर्टी वेलनेस’ को नंबर वन ट्रेंड माना गया था। इस समिट के दौरान दुनियाभर में फॉलो किए जाने वाले फिटनेस आइडिया के आधार पर सबसे पॉपुलर ट्रेंड को चुना जाता है और इसमें डर्टी वेलनेस सबसे प्रचलित आइडिया था। लोगों ने अपनी फिजिकल और मेंथल हेल्थ में सुधारने के लिए इसका सहारा लिया। इस फिटनेस ट्रेंड में धरती और प्रकृति की तरफ झुकाव पर फोकस किया जाता है और इनसे जुड़कर खुद को फिट रखा जाता है।

जमीन से जुड़कर रहते थे पूर्वज (Global Wellness Summit)

समिट के दौरान चर्चा में यह पाया गया कि हमारे पूर्वज जमीन से जुड़कर ही रहते थे। चाहे वह किसान हों या फिर जंगलों में रहने वाले लोग लेकिन विकास के साथ-साथ जंगलों की जगह ऊंची इमारतों ने ले ली और हम मिट्टी से दूर होते चले गए। इसके अलावा आबादी और प्रदूषण की वजह से मिट्टी ने भी अपनी उत्पादकता खो दी. अब उनकी जगह केमिकल्स आ गए हैं जिसका असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। तनाव और डिप्रेशन उसके नतीजे के तौर पर सभी के सामने हैं।

मड बाथ का बढ़ रहा प्रचलन (Global Wellness Summit)

बागबानी यानी गार्डनिंग करने वालों की मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर इसका बड़ा असर देखा गया है। गार्डनिंग से फिट रहने में मदद मिलती है और इससे प्रकृति के करीब आने का मौका मिलता है। जीवन में बदलाव के लिए इस ट्रेंड को अपनाने वाले लोग मिट्टी के साथ खेलते हैं और नंगे पैर घास पर चलते हैं। यह सब नया बिल्कुल नहीं है, लेकिन इसे आधुनिकता की दौड़ में भुला दिया गया है। खुद को मिट्टी में लपेट लेना या कहें कि थोड़ा डर्टी रहना हमारे स्वास्थ्य पर असर डालता है।

सुबह नंगे पैर घास पर टहलना (Global Wellness Summit)

मिट्टी हमारे इकोसिस्टम की सबसे खास चीज मानी जाती है और इंसानों के लिए इससे जुड़ना काफी जरूरी है। यही वजह है कि आजकल मड बाथ और सॉइल बाथ जैसे ट्रेंड देखने को मिलते हैं, जो इसी का हिस्सा हैं। लोग अपने घरों में गार्डनिंग करते हैं। छोटे-छोटे फार्म बनाते हैं ताकि वह किसी न किसी रूप में मिट्टी से जुड़े रहें। इस ट्रेंड के मुताबिक जिम में पसीना बहाने से ज्यादा बेहतर सुबह के वक्त घास पर नंगे पैर टहलना माना गया है।

मेंटल स्ट्रेस और नर्वस सिस्टम (Global Wellness Summit)

ऐसी कई स्टडी हैं जिनमें नंगे पैर घास, मिट्टी, कीचड़ पर चलने के फायदे बताए गए हैं। इसके अलावा अपनी नींद को बेहतर बनाने और रुटीन को ठीक करने से भी हम फिट रह सकते हैं। इससे शारीरिक तनाव के अलावा मेंटल स्ट्रेस और नर्वस सिस्टम पर भी असर पड़ता है। खून को पतला करने से लेकर चोट ठीक करने में मड बाथ से मदद मिलती है और आप हार्ट डिजीज से भी बच सकते हैं।

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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Sandeep Kumar
Sandeep Kumarhttps://www.khabarwala24.com/
मेरा नाम Sandeep Kumar है। मैं एक अनुभवी कंटेंट राइटर हूं और पिछले कुछ सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहा हूं। अभी मैं Khabarwala24 News में कई अलग-अलग कैटेगरी जैसे कि टेक्नोलॉजी, हेल्थ, ट्रैवल, एजुकेशन और ऑटोमोबाइल्स पर कंटेंट लिख रहा हूं। मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपने शब्दों के ज़रिए लोगों को सही, सटीक और दिलचस्प जानकारी दे सकूं।

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