Khabarwala 24 News Lucknow: UP News उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के साथ बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बिना सहमति के 70 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड में बदल दिया गया है। इस मामले में अब बिजली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। उपभोक्ता संगठन विद्युत अधिनियम-2003 का हवाला देते हुए अवमानना याचिका दायर करने जा रहे हैं।
केंद्र सरकार की स्मार्ट मीटर योजना और विवाद (UP News)
केंद्र सरकार की Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) के तहत पूरे उत्तर प्रदेश में पुराने मैनुअल मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जा रहा है। ये स्मार्ट मीटर दोनों मोड (प्रीपेड और पोस्टपेड) में चल सकते हैं। लेकिन प्रदेश की बिजली कंपनियों ने बिना उपभोक्ताओं की लिखित सहमति के 70 लाख से अधिक मीटरों को जबरन प्रीपेड मोड में बदल दिया।
नए बिजली कनेक्शन भी पिछले एक साल से अनिवार्य रूप से प्रीपेड मीटर के साथ ही दिए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि यह विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) का साफ उल्लंघन है, जिसमें उपभोक्ता को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का पूरा अधिकार दिया गया है।
उपभोक्ता परिषद की सख्त प्रतिक्रिया (UP News)
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने इस मामले को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि सोमवार को कानपुर में केस्को (Kanpur Electricity Supply Company) के टैरिफ प्रस्ताव पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सामने अवमानना याचिका दायर की जाएगी।
वर्मा ने मांग की है कि:
- सभी 70 लाख प्रीपेड मीटरों को तुरंत पोस्टपेड मोड में बदलने का विकल्प उपभोक्ताओं को दिया जाए।
- भविष्य में बिना उपभोक्ता की लिखित सहमति के किसी भी मीटर को प्रीपेड मोड में न बदला जाए।
- विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 142 के तहत बिजली कंपनियों और पावर कॉरपोरेशन के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
क्या कहता है विद्युत अधिनियम-2003? (UP News)
विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई भी लाइसेंसधारी (बिजली कंपनी) उपभोक्ता की सहमति के बिना मीटर का प्रकार (प्रीपेड/पोस्टपेड) नहीं बदल सकता। उपभोक्ता को दोनों विकल्पों में से चुनने का अधिकार है। बावजूद इसके बिजली विभाग ने बड़े पैमाने पर इस प्रावधान की अनदेखी की है।
केंद्र सरकार ने हाल ही में लोकसभा में स्मार्ट मीटरों को लेकर अपना रुख साफ किया है, जिसके बाद अब उपभोक्ताओं में इस मुद्दे पर काफी आक्रोश है। कई संगठन मीटरों को फिर से पोस्टपेड मोड में बदलने की मांग कर रहे हैं।
उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ा? (UP News)
- प्रीपेड मीटर में बिजली कटौती का डर हमेशा बना रहता है।
- रीचार्ज भूल जाने पर अचानक बिजली चली जाती है।
- कई उपभोक्ता खासकर बुजुर्ग और कम आय वाले परिवारों को परेशानी हो रही है।
- बिलिंग में पारदर्शिता तो बढ़ी, लेकिन सुविधा कम हुई।
आगे क्या होगा? (UP News)
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग अब इस मामले में अहम भूमिका निभा सकता है। अगर अवमानना याचिका पर सुनवाई होती है और आयोग बिजली कंपनियों को दोषी मानता है तो कंपनियों पर जुर्माना लग सकता है और उपभोक्ताओं को पोस्टपेड विकल्प वापस मिल सकता है।
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