उज्जैन में बाबा महाकाल की भस्म आरती व दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

उज्जैन, 5 मार्च (khabarwala24)। उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीय तिथि गुरुवार के दिन भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। वहीं, सुबह की भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों का तांता देखने को मिला।दूर-दूर से आए श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए बुधवार देर […]

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उज्जैन, 5 मार्च (khabarwala24)। उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीय तिथि गुरुवार के दिन भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। वहीं, सुबह की भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों का तांता देखने को मिला।

दूर-दूर से आए श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए बुधवार देर रात से ही मंदिर परिसर में पहुंचने लगे थे। हर कोई बाबा महाकाल के दर्शन पाने के लिए उत्सुक नजर आया। पूरा मंदिर परिसर ‘जय महाकाल’ के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति और आस्था साफ दिखाई दे रही थी।

बाबा की भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है। इसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। वहीं, भस्म आरती होने के बाद बाबा का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा हुई और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती की गई। इस दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा हुई और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई।

इसके बाद बाबा को चंदन से शृंगार किया गया व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला अर्पित की गई। भक्त बाबा का अद्भुत शृंगार देखकर खुशी से गदगद दिखे। हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है।

बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में मशहूर है। उज्जैन में दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। भस्म आरती का हिस्सा बनने के लिए भक्तों को पहले ही ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है और इस दिन भस्म आरती के लिए नंबर या टोकन लेना पड़ता है और भक्त उसी दिन दर्शन के लिए आते हैं। पंजीकरण के लिए मंदिर द्वारा निर्धारित शुल्क भी देना होता है।

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