नई दिल्ली, 6 फरवरी (khabarwala24)। फरवरी सिर्फ पर्व का महीना ही नहीं, बल्कि बीमारियों का महीना भी है। सर्दियों के महीने में ऋतु परिवर्तन की वजह से कभी गर्मी तो कभी सर्दी लगने की समस्या बनी रहती है।
दिन में धूप होने की वजह से लोग गर्म कपड़ों से परहेज करते हैं और ठंडा पीने का मन करता है, लेकिन बहुत कम ही जानते हैं कि इस दौरान होने वाली हल्की सर्दी ही रोगों का असली कारण है।
फरवरी के महीने में उत्तर भारत में सुहानी धूप और हल्की ठंड का मौसम होता है, इसे ही ऋतु परिवर्तन कहा जाता है क्योंकि यह सर्दी के जाने का संकेत है, लेकिन उसी दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सबसे अधिक प्रभावित होती है क्योंकि पहाड़ों की तरफ से आने वाली ठंडी हवाएं और दिन में निकलने वाली तेज धूप का मेल वायरस और बैक्टीरिया के पनपने का सही समय और सही वातावरण होता है। यही कारण है कि फरवरी और मार्च, खासकर होली के समय तक, वायरल, खांसी, फीवर और टाइफाइड के केस सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं।
आयुर्वेद में फरवरी से लेकर मार्च तक खास तरीके की देखभाल करने की सलाह दी है। आयुर्वेद मानता है कि इस मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाना बहुत जरूरी है। इसके लिए आयुर्वेद में कुछ उपाय भी बताए गए हैं। पहला है गिलोय और तुलसी के काढ़े का सेवन करना। रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए गिलोय और तुलसी का काढ़ा औषधि की तरह काम करता है। आयुर्वेद में इसे ‘अमृता’ कहा जाता है। इसके लिए रोज सुबह गिलोय और तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीएं। इससे संक्रमण का खतरा कम होगा।
दूसरा उपाय है सोंठ और शहद का सेवन करना। सोंठ और शहद का सेवन खांसी और गले में होने वाले रोगों से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। इससे फेफड़ों में जमा कफ भी ढीला पड़ जाता है और बाहर निकलने लगता है। रोजाना सोंठ और शहद सर्दी से बचाने में भी मदद करेगा। ऋतु परिवर्तन के समय ठंडा पानी या पेय पदार्थों को पीने का मन करता है, लेकिन आयुर्वेद पूरे महीने गुनगुना पानी पीने की सलाह देता है। फरवरी के महीने में फ्रिज का पानी पीना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। इसके साथ ही दही और आइसक्रीम जैसी चीजों से परहेज करें और आहार में सर्दियों की तरह की गर्म तासीर वाला खाना खाएं। गर्मी को देखते हुए भी गर्म कपड़ों से परहेज न करें।
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