अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े 200 से अधिक अवैध ऑनलाइन फार्मेसी डोमेन जब्त किए

वाशिंगटन, 5 फरवरी (khabarwala24)। अमेरिका ने ऑनलाइन फार्मेसियों से जुड़े भारत-आधारित एक अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक संगठन (टीसीओ) की 200 वेबसाइट के डोमेन को जब्त कर लिया है। अमेरिका के ड्रग प्रवर्तन प्रशासन (डीईए) ने यह कार्रवाई की।डीईए के अनुसार, यह संगठन अमेरिका में काम कर रहा है और कथित तौर पर कम से कम छह जानलेवा […]

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वाशिंगटन, 5 फरवरी (khabarwala24)। अमेरिका ने ऑनलाइन फार्मेसियों से जुड़े भारत-आधारित एक अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक संगठन (टीसीओ) की 200 वेबसाइट के डोमेन को जब्त कर लिया है। अमेरिका के ड्रग प्रवर्तन प्रशासन (डीईए) ने यह कार्रवाई की।

डीईए के अनुसार, यह संगठन अमेरिका में काम कर रहा है और कथित तौर पर कम से कम छह जानलेवा और चार ओवरडोज के मामलों के लिए जिम्मेदार था। 27 जनवरी से शुरू होकर पूरे अमेरिका में डीईए अधिकारियों ने कई ऑपरेशन किए और चार लोगों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही, पांच तत्काल निलंबन आदेश और एक कारण बताओ नोटिस जारी किए।

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अमेरिकी ड्रग प्रवर्तन प्रशासन ने कहा कि ये दोनों प्रशासनिक कार्रवाई हैं, जो डीईए रजिस्टर्ड लोगों के खिलाफ सार्वजनिक स्वास्थ्य या सुरक्षा के खतरों से जनता की रक्षा के लिए की जाती हैं। ये कार्रवाई प्रशासन की ओर से 200 से ज्यादा ऑनलाइन फार्मेसियों को बंद करने के अलावा थीं, जिन पर बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के सैकड़ों-हजारों डायवर्टेड फार्मास्यूटिकल्स और नकली गोलियों के ऑर्डर भरने का आरोप था।

नियंत्रित पदार्थ अधिनियम (सीएसए) के तहत, डीईए फार्मेसियों की हिरासत में नियंत्रित पदार्थ की हैंडलिंग, भंडारण और वितरण को विनियमित करता है। सीएसए में यह शर्त है कि फार्मेसियों को केवल वैध प्रिस्क्रिप्शन मिलने पर ही कंट्रोल्ड सब्सटेंस देने की अनुमति है, जो एक व्यक्तिगत प्रैक्टिशनर की ओर से अपने सामान्य पेशेवर अभ्यास के दौरान एक वैध चिकित्सा उद्देश्य के लिए जारी किया गया हो।

डीईए के अनुसार, जांच में पाया गया कि इन ऑनलाइन फार्मेसियों के ऑपरेटर और उनके सह-साजिशकर्ता बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के, पूरे अमेरिका में ग्राहकों को अवैध रूप से डायवर्टेड दवाएं बेच रहे थे और भेज रहे थे, जो सीएसए का उल्लंघन था और मरीजों को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए डिस्ट्रीब्यूशन के एक बंद सिस्टम में खतरनाक तरीके से घुसपैठ कर रहे थे।

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इस जांच के दौरान डीईए ने हजारों ऐसे ग्राहकों की पहचान की, जिन्होंने इन ऑनलाइन फार्मेसियों के माध्यम से दवाएं खरीदी थीं। इसके बाद डीईए ने इस चल रही जांच के समर्थन में जानकारी मांगने के लिए जनता को 20 हजार से अधिक पत्र भेजे हैं।

ड्रग प्रवर्तन प्रशासन ने एक बयान में कहा कि अवैध ऑनलाइन फार्मेसियां ​​अक्सर असली दिखने के लिए अमेरिकी-आधारित वेबसाइट पते और प्रोफेशनल दिखने वाले डिजाइन का इस्तेमाल करती हैं, जबकि असल में वे ऐसी नहीं होतीं। ये कंपनियां अवैध रूप से काम करती हैं, जानबूझकर अमेरिकी ग्राहकों को यह विश्वास दिलाकर धोखा देती हैं कि वे कानूनी रूप से सुरक्षित, विनियमित दवाएं खरीद रहे हैं।

बयान में आगे कहा गया, “ऑपरेशन मेल्टडाउन के तहत बंद की गई कई साइटों ने खुद को वैध, अमेरिका-आधारित और एफडीए-अनुमोदित होने का दावा किया था, लेकिन डीईए की जांच में पता चला कि इन साइटों के ऑपरेटर अक्सर ड्रग तस्करों के साथ मिलकर ऑनलाइन ऑर्डर को नकली गोलियों या गलत तरीके से इस्तेमाल की गई दवाओं से पूरा करते थे। ये नकली दवाएं अक्सर फेंटानिल या मेथामफेटामाइन से बनी होती हैं और इन्हें लेने से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं, जिसमें हानिकारक साइड इफेक्ट, अप्रभावी इलाज और यहां तक ​​कि मौत भी शामिल है।”

अमेरिकी ड्रग प्रवर्तन प्रशासन ने बयान में यह भी कहा कि अपनी ग्लोबल पहुंच का इस्तेमाल करते हुए डीईए भारत सरकार के कानून प्रवर्तन भागीदारों के साथ मिलकर उन खतरनाक आपराधिक संगठनों की पहचान करने, जांच करने और उन्हें खत्म करने के लिए सक्रिय रूप से सहयोग करता है, जो इस तरह के अवैध ड्रग तस्करी ऑपरेशन में शामिल हैं।

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