बलौदा बाजार, 23 जनवरी (khabarwala24)। धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। इसी कड़ी में एक गंभीर अनियमितता सामने आने पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है।
फर्जी तरीके से धान की तौल दर्शाकर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने वाले प्रभारी समिति प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। यह कार्रवाई न सिर्फ दोषी अधिकारी के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे धान उपार्जन तंत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश भी है कि नियमों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम खरतोरा स्थित धान उपार्जन केंद्र में यह मामला सामने आया है। यहां के प्रभारी समिति प्रबंधक दुर्गेश कुमार गेंड्रे द्वारा 21 जनवरी 2026 को गंभीर अनियमितता की गई। आरोप है कि उन्होंने अपने बड़े भाई सुरेंद्र कुमार गेंड्रे के नाम पर जारी टोकन का दुरुपयोग करते हुए बिना धान लाए ही 53 कट्टा, कुल 21.20 क्विंटल सरना धान की फर्जी तौल दर्शा दी। इस कथित धान की कीमत 50,222.50 रुपए बताई गई, जिसके लिए न केवल फर्जी तौल पत्रक जारी किया गया, बल्कि ऑनलाइन प्रणाली में उसकी प्रविष्टि भी की गई। यही नहीं, ऑनलाइन भुगतान की प्रविष्टि भी कर दी गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरा मामला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
जांच में यह बात सामने आई है कि दुर्गेश कुमार गेंड्रे ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए धान खरीदी नीति में स्पष्ट रूप से उल्लेखित प्रावधानों का उल्लंघन किया। धान खरीदी प्रक्रिया में यह अनिवार्य है कि धान की वास्तविक आवक, भौतिक सत्यापन और तौल के बाद ही ऑनलाइन प्रविष्टि और भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाए। इस मामले में बिना किसी वास्तविक धान की आवक के ही पूरी प्रक्रिया को कागजों और ऑनलाइन सिस्टम में पूरा दिखा दिया गया। इससे शासन को सीधी आर्थिक क्षति पहुंची है और धान खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
जैसे ही इस अनियमितता की जानकारी जिला प्रशासन को मिली, मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कराई गई। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर प्रशासन ने किसी भी तरह की ढिलाई न बरतते हुए पुलिस थाना पलारी में प्रभारी समिति प्रबंधक दुर्गेश कुमार गेंड्रे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। यह एफआईआर क्रमांक 96 के तहत दर्ज की गई है। प्रशासन का कहना है कि आगे की जांच में यदि और भी तथ्य सामने आते हैं, तो उसके आधार पर अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब धान खरीदी सीजन अपने चरम पर है और हजारों किसान अपनी उपज लेकर उपार्जन केंद्रों पर निर्भर हैं। ऐसे में इस तरह का फर्जीवाड़ा न केवल शासन को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि ईमानदार किसानों के हक पर भी असर डालता है।
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