भोपाल, 8 जनवरी (khabarwala24)। मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों की बढ़ती गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य की पुलिस ने मुहिम छेड़ दी है। इस मुहिम का असर भी नजर आ रहा है। कई स्थानों पर साइबर अपराध में संलग्न लोग पकड़े गए हैं, तो वहीं इनके जाल में फंसे लोग सुरक्षित भी निकल गए।
राज्य की पुलिस द्वारा साइबर अपराधों के विरुद्ध निरंतर सतर्कता एवं तकनीकी दक्षता के साथ कार्रवाई की जा रही है। बीते एक सप्ताह के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में फर्जी ट्रेडिंग एप, डिजिटल अरेस्ट, टेलीग्राम आधारित टास्क फ्रॉड एवं ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गई है।
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भोपाल के साइबर क्राइम में दर्ज एक प्रकरण में फेलकोन ट्रेडर्स नामक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया गया। जांच के दौरान इंदौर के विजयनगर स्थित स्काई कॉर्पोरेट पार्क में संचालित फर्जी कॉल सेंटर पर कार्रवाई करते हुए 10 युवक एवं 10 युवतियों सहित कुल 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
आरोपियों द्वारा नकली मोबाइल एप्लिकेशन एवं वेबसाइट के माध्यम से प्रारंभिक मुनाफा दिखाकर निवेशकों का विश्वास अर्जित किया जाता था, तथा बाद में संपर्क तोड़कर ठगी की जाती थी। मौके से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, बैंकिंग दस्तावेज, एटीएम कार्ड, चेकबुक एवं नकद राशि जप्त की गई।
साइबर सेल ने बुरहानपुर में हाई रिटर्न फॉरेक्स ट्रेडिंग इन्वेस्टमेंट के नाम पर ठगी गई 8 लाख 70 हजार की राशि को सुरक्षित रूप से पीड़ित के खाते में वापस कराया। इसी तरह उज्जैन जिले में पुलिस ने वृद्ध दंपती को “डिजिटल अरेस्ट” के जाल से मुक्त कराया।
आरोपियों ने स्वयं को मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का भय दिखाते हुए 3 लाख रुपए की आरटीजीएस कराने का प्रयास किया। बैंक अधिकारियों द्वारा समय पर सूचना दिए जाने पर पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर खाताधारक को समझाइश दी और बड़ी आर्थिक ठगी को रोका।
बैतूल जिले के थाना गंज क्षेत्र में “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर 80 वर्षीय बुजुर्ग से 23 लाख 50 हजार रुपए की बड़ी साइबर ठगी का गंभीर प्रकरण सामने आया। फरियादी को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर भयभीत किया गया तथा मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप लगाकर खातों की जांच के नाम पर आरटीजीएस के माध्यम से बड़ी राशि ट्रांसफर कराई गई।
प्रकरण में थाना गंज पुलिस द्वारा अपराध पंजीबद्ध कर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों एवं डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच प्रारंभ की गई है।
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एसएनपी/एएमटी
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