बैंक धोखाधड़ी मामला: सीबीआई कोर्ट ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के दो अधिकारियों को सुनाई तीन साल की सजा

पुणे, 4 जनवरी (khabarwala24)। पुणे स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पिंपरी शाखा से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में दो बैंक अधिकारियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई। अदालत ने जाली दस्तावेजों के जरिए हाउसिंग लोन धोखाधड़ी को गंभीर अपराध माना और दोषियों पर जुर्माना भी लगाया।सीबीआई ने यह मामला […]

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now

पुणे, 4 जनवरी (khabarwala24)। पुणे स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पिंपरी शाखा से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में दो बैंक अधिकारियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई। अदालत ने जाली दस्तावेजों के जरिए हाउसिंग लोन धोखाधड़ी को गंभीर अपराध माना और दोषियों पर जुर्माना भी लगाया।

सीबीआई ने यह मामला 17 फरवरी 2016 को दर्ज किया था। जांच में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन एजीएम राकेश जायसवाल और कई उधारकर्ताओं के खिलाफ बैंक को धोखा देने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप सामने आए थे। जांच के बाद सीबीआई ने अलग-अलग साजिशों से जुड़े मामलों में कुल छह चार्जशीट दाखिल की थीं।

स्पेशल केस नंबर 21/2018 में यह आरोप था कि तत्कालीन एजीएम राकेश जायसवाल, उधारकर्ता प्रशांत लक्ष्मण विस्पुते, सह-उधारकर्ता प्रियंका प्रशांत विस्पुते, तत्कालीन मैनेजर नंदकिशोर खैरनार और असिस्टेंट मैनेजर रवि भूषण प्रसाद ने मिलीभगत कर 18.75 लाख रुपए का हाउसिंग लोन मंजूर कराया। इस लोन को मंजूर करने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार, प्रियंका प्रशांत विस्पुते ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पिंपरी शाखा को कुल 24.54 लाख रुपए का वित्तीय नुकसान पहुंचाया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बैंक अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए लोन स्वीकृति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं कीं।

मामले की सुनवाई के दौरान दो आरोपियों-तत्कालीन एजीएम राकेश जायसवाल और मुख्य उधारकर्ता प्रशांत लक्ष्मण विस्पुते की मृत्यु हो गई, जिसके चलते उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल समाप्त कर दिया गया।

लंबे ट्रायल के बाद सीबीआई कोर्ट ने शेष तीन लोगों को दोषी करार दिया। सीबीआई की विशेष अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पिंपरी शाखा के तत्कालीन मैनेजर नंदकिशोर खैरनार और तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर रवि भूषण प्रसाद को तीन-तीन साल की सश्रम कैद और प्रत्येक पर 75,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा सह उधारकर्ता प्रियंका प्रशांत विस्पुते को दो साल की सश्रम कैद और 25,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी पर अंकुश लगाया जा सके।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related News

Breaking News