पथियानाडु श्री भद्रकाली मंदिर : माता के दरबार में कष्टों से मिलती है मुक्ति

तिरुवनंतपुरम, 21 दिसंबर (khabarwala24)। दक्षिण भारत में मां काली को समर्पित कई मंदिर हैं। केरल के मुल्लास्सेरी में मां के सबसे उग्र रूप भद्रकाली की पूजा होती है। इस मंदिर में भक्तों को संकटों से मुक्ति दिलाने के लिए मां भद्रकाली स्वयं आती हैं और सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।केरल के त्रिशूर जिले के पास […]

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now

तिरुवनंतपुरम, 21 दिसंबर (khabarwala24)। दक्षिण भारत में मां काली को समर्पित कई मंदिर हैं। केरल के मुल्लास्सेरी में मां के सबसे उग्र रूप भद्रकाली की पूजा होती है। इस मंदिर में भक्तों को संकटों से मुक्ति दिलाने के लिए मां भद्रकाली स्वयं आती हैं और सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

केरल के त्रिशूर जिले के पास बसे गांव मुल्लास्सेरी में मां के सबसे उग्र स्वरूप भद्रकाली की पूजा होती है। मां के इस मंदिर को पथियानाडु श्री भद्रकाली मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर में मां की अनोखी प्रतिमा विराजमान है, जिसमें मां का छोटा और उग्र स्वरूप देखने को मिलता है और सिर के ऊपर कई सारे नाग हैं। इन नागों को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है।

मंदिर में मौजूद भद्रकाली की प्रतिमा 4 फीट की है, जो केरल के बाकी मंदिरों में स्थापित प्रतिमाओं से काफी बड़ी है। मंदिर का प्रबंधन पथियानाडु श्री भद्रकाली क्षेत्रम ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। मंदिर में देवी भद्रकाली को प्रमुख देवी के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। इस मूर्ति को स्थानीय मलयालम भाषा में थिरुमुडी के नाम से जाना जाता है। प्रांगण में भगवान महागणपति और नागराज के मंदिर भी बने हैं। मंदिर में काल सर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

पौराणिक कथाओं में मां काली के भद्रकाली अवतार के बारे में जानकारी मिलती है। असुर दारिका को भगवान ब्रह्मा से एक वरदान मिला था कि उसे 14 लोकों में कोई भी शक्ति नहीं मार सकती है। वरदान मिलने के बाद असुर ने देवलोक में उत्पात मचाना शुरू किया। यहां तक कि देवताओं को हराकर अपना राज स्थापित किया। भयभीत देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे। भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख से भद्रकाली को प्रकट किया और भद्रकाली ने असुर का अंत किया।

मां भद्रकाली का विकराल स्वरूप असुर को मारने के बाद भी रक्त का प्यासा रहा और आम जन-हानि करने लगा। मां भद्रकाली के क्रोध को शांत करने के लिए भगवान उनके रास्ते में लेट गए। इसके बाद मां का गुस्सा शांत हुआ।

इस मंदिर का उत्सव मलयालम महीने (फरवरी और मार्च के महीने के बीच) कुंभ भरणी से शुरू होता है। त्योहार के दिनों में बालीथुवल, सर्पबली, थंबुरान के लिए भस्माभिषेकम, गृहलक्ष्मी पूजा और ग्रहदोशनिवारण पूजा होती है। मां भद्रकाली को चावल से बना प्रसाद अर्पित किया जाता है।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related News

Breaking News