वाशिंगटन, 4 मार्च (khabarwala24)। व्हाइट हाउस ने दावा किया कि तेहरान के पास इतना अधिक संवर्धित यूरेनियम है जिससे “11 परमाणु बम के बराबर परमाणु सामग्री” तैयार की जा सकती है। प्रशासन का कहना है कि हाल की बातचीत में मिली जानकारी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के परमाणु ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई करने का फैसला लेने में अहम भूमिका निभाई।
ईरान के साथ हाल में हुई बातचीत से जुड़े ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तेहरान के पास इस समय अलग-अलग ठिकानों पर करीब 10,000 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। इनमें से 460 किलोग्राम यूरेनियम 60 प्रतिशत तक शुद्ध किया जा चुका है। अधिकारी के अनुसार यह स्तर हथियार बनाने के लिए जरूरी 90 प्रतिशत शुद्धता के काफी करीब है।
अधिकारी ने कहा कि 60 प्रतिशत संवर्धित 460 किलोग्राम यूरेनियम को 90 प्रतिशत तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगेगा, और इतना पदार्थ लगभग 11 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है।
ईरान के साथ तीन दौर की बातचीत में शामिल दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह ये वार्ता टूट गई। उनका कहना है कि इन बातचीतों से उन्हें लगा कि ईरान कूटनीति को टाल रहा है और अपने परमाणु कार्यक्रम के अहम हिस्सों को बचाए रखना चाहता है।
दूसरे वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बातचीत के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कभी भी कोई स्पष्ट और विस्तृत प्रस्ताव नहीं रखा और ऐसा लग रहा था कि वह सिर्फ समय निकालने की कोशिश कर रहा है।
अधिकारी ने यह भी बताया कि ईरान के भंडार में करीब 1,000 किलोग्राम यूरेनियम 20 प्रतिशत तक और लगभग 8,500 किलोग्राम 3.67 प्रतिशत तक संवर्धित है। उनका कहना है कि 3.67 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक पहुंचने में करीब ढाई से तीन महीने लग सकते हैं, जबकि 60 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक जाने में शायद एक हफ्ते या अधिकतम 10 दिन लगेंगे।
अमेरिकी वार्ताकारों ने यह भी कहा कि बातचीत के दौरान तेहरान रिसर्च रिएक्टर को लेकर गंभीर सवाल उठे। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि यह फैसिलिटी सिविलियन इस्तेमाल के लिए मेडिकल आइसोटोप बना रही थी, लेकिन अमेरिकी नेगोशिएटर्स ने कहा कि यह एक्सप्लेनेशन मौजूद डेटा से मेल नहीं खाता।
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जांच में संकेत मिले कि रिएक्टर के पास सात से आठ साल का ईंधन जमा था और वहां बताए अनुसार आइसोटोप का उत्पादन नहीं हो रहा था।
अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को अपना “अधिकार” बताते हुए अमेरिका का वह प्रस्ताव भी ठुकरा दिया, जिसमें नागरिक रिएक्टरों के लिए मुफ्त परमाणु ईंधन देने की पेशकश की गई थी। दूसरे अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी पक्ष ने कहा था कि जितने समय तक जरूरत हो, बिना किसी खर्च के ईंधन दिया जाएगा, लेकिन ईरान ने इसे अपनी गरिमा के खिलाफ बताया।
अधिकारियों ने तर्क दिया कि इन डेवलपमेंट से अमेरिकी प्रशासन को यकीन हो गया कि ईरान के प्रोग्राम में न्यूक्लियर हथियार जल्दी बनाने के लिए ज़रूरी बिल्डिंग ब्लॉक्स हैं। उनका कहना है कि ईरान ने राजनीतिक स्तर पर कुछ रियायतों की बात तो की, लेकिन परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी ढांचे को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ।
अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने पारदर्शिता से जुड़े कदमों का विरोध किया और प्रस्तावित परमाणु ढांचे की तकनीकी समीक्षा के लिए निरीक्षकों को अनुमति देने में भी हिचकिचाहट दिखाई।
यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई जब वाशिंगटन, ईरान के परमाणु ढांचे के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखे हुए है। प्रशासन का कहना है कि खुफिया सूचनाओं से संकेत मिला था कि ईरान का कार्यक्रम खतरनाक स्तर के करीब पहुंच रहा है।
वहीं ईरान लंबे समय से यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। हालांकि पश्चिमी देश उस पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
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