Khabarwala 24 News Hapur: Hapur News हापुड़। फेडरेशन ऑफ आब्स एंड गायनी सोसायटी, मुंबई के देशव्यापी आह्वान पर रविवार को हापुड़ आब्स एंड गायनी सोसायटी के पदाधिकारियों द्वारा ‘अभया दिवस’ का आयोजन किया गया। बीते वर्ष इसी दिन देश के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में पीजी ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म और हत्या के विरोध में यह विशेष दिवस मनाया जाता है। कार्यक्रम के दौरान महिला चिकित्सकों ने इस तरह की क्रूर घटनाओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षित वातावरण व कड़े कानूनी इंतजामों की पुरजोर मांग की।
स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती: अस्पताल के भीतर और बाहर खतरे में जान (Hapur News)
हापुड़ आब्स एंड गायनी सोसायटी की पदाधिकारियों ने विचार-विमर्श के दौरान कहा कि देश में स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा आज एक अत्यंत गंभीर मुद्दा बन चुकी है। इस समस्या के दायरे में केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि नर्सिंग स्टाफ, आशा वर्कर्स और अन्य सभी प्रकार के अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मी आते हैं।
चिकित्सकों ने चिंता जताते हुए कहा कि अस्पताल परिसर के भीतर और बाहर, दोनों ही स्थानों पर सुरक्षा का भारी अभाव है। आए दिन अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टाफ पर जानलेवा हमले, तोड़फोड़ और मरीजों के तीमारदारों द्वारा अभद्रता व मारपीट की घटनाएं बढ़ रही हैं।

बुनियादी सुविधाओं और नाइट शिफ्ट को लेकर उठाई चिंताएं (Hapur News)
चिकित्सकों के अनुसार, अस्पतालों में सुरक्षा और सुविधाओं के अभाव में लगातार लंबे समय तक काम करने से स्वास्थ्य कर्मियों को कई शारीरिक व मानसिक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार तनाव से कमर दर्द, सिरदर्द, हाई ब्लड प्रेशर, नींद न आना और प्रजनन क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ने जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
“केवल पुलिस बढ़ाने से नहीं, पूरे सिस्टम में बदलाव से मिलेगी सुरक्षा” (Hapur News)
विशेषज्ञों और वरिष्ठ चिकित्सकों का स्पष्ट मानना है कि अस्पतालों में महज पुलिस बल या सुरक्षा गार्ड तैनात करने से समस्या का स्थाई समाधान नहीं होगा। इसके लिए पूरे प्रशासनिक और चिकित्सा प्रबंधन सिस्टम में बुनियादी सुधार लाने होंगे।
यह रहे मौजूद (Hapur News)
कार्यक्रम में उपस्थित हापुड़ आब्स एंड गायनी सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. दीपशिखा गोयल, सचिव डॉ. अनुभा दूदिया, संरक्षक डॉ. आशा मिश्रा सहित बड़ी संख्या में उपस्थित महिला चिकित्सकों ने सरकार और प्रशासन से स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मियों को निर्भीक माहौल में काम करने का अधिकार और सुरक्षा प्रदान करने की मांग की।
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