Khabarwala24 Kanwar Yatra 2026: धार्मिक आस्था, पारिवारिक संस्कारों और बुजुर्गों के प्रति अटूट समर्पण की एक बेहद अनुकरणीय और भावुक कर देने वाली मिसाल हरिद्वार से दिल्ली के बीच देखने को मिल रही है। दिल्ली के शाहदरा की रहने वाली काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीया सास चंद्रो देवी की धार्मिक इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें साथ लेकर पैदल कांवड़ यात्रा पर निकली हैं। काजल बीते 21 जुलाई को हरिद्वार स्थित पावन हर की पौड़ी से पवित्र गंगाजल लेकर रवाना हुई थीं और अब गाजियाबाद जिले के मोदीनगर व मुरादनगर के रास्ते दिल्ली की तरफ बढ़ रही हैं।
सड़क मार्ग से गुजरते हुए 90 साल की बुजुर्ग महिला और उनकी सेवा भाव में जुटी बहू को देखकर रास्ते में आम श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं।
सास की इच्छा पूरी करने के लिए उठाया बड़ा कदम (Kanwar Yatra 2026)
काजल चौधरी ने अपनी इस यात्रा के संदर्भ में बताया कि उनकी सास चंद्रो देवी की उम्र जीवन के नौ दशक (90 वर्ष) पूरे कर चुकी है। अत्यधिक वृद्धावस्था के बावजूद उनकी हार्दिक इच्छा थी कि वे हरिद्वार से पैदल यात्रा कर गंगाजल लाएं और धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बनें। जब सास ने अपनी यह इच्छा जाहिर की, तो काजल ने बिना किसी हिचकिचाहट के उन्हें अपने साथ ले जाने और पैदल सफर तय करने का संकल्प ले लिया।
यात्रा के दौरान अपनी बुजुर्ग सास की सेहत और सहूलियत का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। काजल बताती हैं कि वे रास्ते में बने शिविरों या सुरक्षित स्थानों पर समय-समय पर रुककर आराम करती हैं और सास को विश्राम कराने के बाद ही आगे का सफर तय करती हैं। इतनी अधिक उम्र होने के बाद भी चंद्रो देवी का आध्यात्मिक उत्साह और हौसला देखते ही बनता है।
“सास ने कभी परिवार संभाला था, अब मेरी सेवा करने की बारी” (Kanwar Yatra 2026)
काजल का कहना है कि यह केवल एक सामान्य धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि अपनी सास के प्रति बहु होने का कर्तव्य निभाने और उनके त्याग का सम्मान करने का एक माध्यम है। उन्होंने भावुक होकर कहा, “जीवन के शुरुआती दिनों में मेरी सास ने पूरे परिवार का पालन-पोषण किया, हमें संभाला और हमारा ख्याल रखा। अब जब वे जीवन के इस पड़ाव पर हैं, तो यह मेरा नैतिक कर्तव्य और सौभाग्य है कि मैं उनकी सेवा करूं और उनकी धार्मिक मनोकामनाओं को पूरा करने में उनका संबल बनूं।”
पहले वृंदावन की 84 कोस परिक्रमा भी करा चुकी हैं (Kanwar Yatra 2026)
यह पहला मौका नहीं है जब काजल ने अपनी सास की धार्मिक यात्रा में भागीदार बनकर उदाहरण पेश किया हो। इससे पूर्व भी वे अपनी सास चंद्रो देवी को वृंदावन की प्रसिद्ध और कठिन 84 कोस की परिक्रमा सफलतापूर्वक करा चुकी हैं। अब दोनों का अगला लक्ष्य हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली के शाहदरा तक की पैदल दूरी को सकुशल पूरा करना है।
रास्ते में मिल रहा लोगों का अपार स्नेह और सम्मान (Kanwar Yatra 2026)
90 वर्षीय चंद्रो देवी और उनकी सेवा में तत्पर बहू काजल की यह अनूठी कांवड़ यात्रा अब महज एक व्यक्तिगत यात्रा नहीं रह गई है। यह समाज में बुजुर्गों के प्रति आदर, सेवा भावना और रिश्तों की गरिमा का एक बड़ा संदेश दे रही है। यात्रा मार्ग में कई जगहों पर शिवभक्त और स्थानीय निवासी न केवल उनका स्वागत कर रहे हैं, बल्कि उन्हें खान-पान व विश्राम हेतु पूरा सहयोग भी प्रदान कर रहे हैं। हरिद्वार से दिल्ली तक का यह सफर अब सास-बहू के रिश्ते की पवित्रता और अपनापे की एक मिसाल बन चुका है।
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