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Hapur फर्जी कंपनी बनाकर ठगी करने वाले पांच आरोपियों को पांच-पांच साल की सजा

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Khabarwala 24 News Hapur: फर्जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर लोगों से निवेश के नाम पर ठगी करने के मामले में सीजेएम न्यायालय ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। न्यायालय ने इस मामले में दोषी पाए गए पांच अभियुक्तों को पांच-पांच वर्ष के साधारण कारावास और प्रत्येक पर पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

शासकीय अधिवक्ता सुनील ने बताया कि यह मामला गढ़मुक्तेश्वर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। ब्रजघाट निवासी रजनी बंसल ने सितंबर 2022 में थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़िता ने बताया कि वह शिक्षिका हैं और उनके पति विपिन बंसल एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं।

निवेश के नाम पर रचा गया ठगी का जाल (Hapur)

पीड़िता के अनुसार, उनके पति के पूर्व परिचित अशोक कुमार निवासी ग्राम चांदनेर थाना बहादुरगढ़ 9 जून 2019 को उनके घर पहुंचे। अशोक के साथ उसका भाई धर्मपाल भी था। दोनों ने खुद को एक इनवेस्टमेंट कंपनी से जुड़ा बताते हुए कहा कि उन्होंने “निफटेक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड” नाम से कंपनी खोल रखी है, जिसमें निवेश करने पर बैंक से कहीं अधिक मुनाफा दिलाया जाता है।

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आरोपियों ने यह भी दावा किया कि उनके द्वारा क्षेत्र के कई लोगों को निवेश पर अच्छा लाभ दिलाया जा चुका है। शुरू में पीड़िता और उनके पति ने पैसे लगाने से इनकार किया, लेकिन आरोपियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे उनके पूरे पैसों की जिम्मेदारी लेंगे।

13 लाख 10 हजार रुपये की ठगी (Hapur)

आरोपियों के झांसे में आकर पीड़िता और उनके पति ने अपनी मेहनत की कमाई के 13 लाख 10 हजार रुपये अलग-अलग तिथियों में दोनों भाइयों को दे दिए। इसकी रसीदें भी पीड़िता के पास मौजूद थीं।
आरोपियों ने केवल 20 जुलाई 2019 को दस हजार रुपये मुनाफे के नाम पर पीड़िता के खाते में ट्रांसफर किए।

अप्रैल 2020 में जब पीड़िता ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने यह कहकर टाल दिया कि पैसा दो साल के लिए फिक्स कर दिया गया है, जिससे अधिक मुनाफा मिलेगा।

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अन्य लोगों से भी की गई ठगी (Hapur)

बाद में पीड़िता को जानकारी मिली कि अशोक और उसका भाई धर्मपाल क्षेत्र के कई अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की ठगी कर चुके हैं। दोनों उस समय जेल में थे और पुलिस प्रशासन द्वारा इनके बैंक खाते भी सीज कर दिए गए थे, जिसके कारण चेक का लेन-देन भी बंद हो चुका था।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत उनकी और उनके पति की पूरी जमा पूंजी धोखाधड़ी से हड़प ली।

न्यायालय का फैसला (Hapur)

शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर 31 जनवरी को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
सीजेएम न्यायालय में सुनवाई के बाद न्यायाधीश सौरभ वर्मा ने—

  • अशोक (ग्राम चांदनेर, थाना बहादुरगढ़)
  • धर्मपाल
  • सुषमा
  • अशोक (ग्राम भड़काऊ, थाना नरसैना, जनपद बुलंदशहर)
  • चंद्रकिरण (ग्राम बागड़पुर, थाना गढ़मुक्तेश्वर)

को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच साल के साधारण कारावास और प्रत्येक पर पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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