लेह, 26 सितंबर (khabarwala24)। एलबीए प्रमुख दोरजे लाक्रूक ने शुक्रवार को लेह में हुई हिंसा को लेकर अफसोस जाहिर किया।
उन्होंने समाचार एजेंसी khabarwala24 से बातचीत में कहा कि हमारे लोगों ने कभी-भी हिंसा की पैरोकारी नहीं की। हम कभी-भी हिंसा के समर्थक नहीं रहे। लेकिन, निश्चित तौर पर इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता है कि हमारे यहां पर बेरोजगार युवाओं की कुंठा अपने चरम पर पहुंच चुकी थी। जिस तरह से प्रेशर कुकर एक वक्त के बाद ब्लास्ट हो जाता है, ठीक उसी प्रकार से हमारे बेरोजगार युवाओं का क्रोध अपने चरम पर पहुंच गया और ब्लास्ट हो गया।
साथ ही, उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से लेह में शांति की अपील के संबंध में सवाल किए जाने पर कहा कि ना सिर्फ राहुल गांधी, बल्कि अन्य लोगों को भी लेह में शांति की अपील करनी चाहिए। मैं कभी भी हिंसा का समर्थक नहीं रहा हूं। हम लोग लंबे समय से शांतिपूर्वक तरीके से आंदोलन कर रहे थे। हम लोग अपनी मांगों को केंद्र सरकार के समक्ष पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन, यह दुख की बात है कि लेह में स्थिति तनावग्रस्त हो गई।
उन्होंने कहा कि हिंसा को लेकर कांग्रेस या किसी अन्य तत्व पर आरोप लगाकर सरकार अपनी विफलता को छुपाने की कोशिश कर रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती है।
वहीं, इस हिंसा के पीछे विदेशी हाथ के शामिल होने के संबंध में सवाल करने पर उन्होंने दो टूक कहा कि अगर इस पूरी हिंसा के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है, तो मेरा सीधा-सा सवाल है कि आखिर सरकार क्या कर रही है। सरकार को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए। सरकार को यह साफ करना चाहिए कि आखिर इसके पीछे कौन है। मैं फिर से इस बात को दोहरा रहा हूं कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने इस हिंसा को नेपाल में हाल ही में ‘जेनजी’ की ओर से किए गए विरोध प्रदर्शन की प्रेरणा का परिणाम बताने पर कहा कि मैं इस बारे में कुछ भी नहीं कह सकता हूं। मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। लिहाजा, मैं इस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं कर सकता हूं।
लेह हिंसा की जांच एनआईए से कराए जाने की मांग को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि लेह हिंसा की जांच एनआईए से कराने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है, क्योंकि यह कोई टेरर का मामला नहीं है। इसके अलावा, मैं यह भी स्पष्ट कर देता हूं कि अगर इस पूरी हिंसा की जांच एनआईए से कराई जाएगी, तो ऐसा करके लेह के लोगों को बदनाम करने की कोशिश की जाएगी, जिसे हम लोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।
Source : IANS
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