नई दिल्ली/अमृतसर, 15 जनवरी (khabarwala24)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को पंजाब के अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत की और संबोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद छात्र अलग-अलग दिशाओं में अपनी यात्रा शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि कुछ सरकारी या निजी क्षेत्र में सेवा करेंगे, कुछ उच्च शिक्षा या अनुसंधान करेंगे, जबकि कई अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करेंगे या शिक्षण में अपना भविष्य बनाएंगे। हालांकि प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग योग्यताओं और कौशलों की आवश्यकता होती है, लेकिन कुछ गुण हर क्षेत्र में प्रगति के लिए समान रूप से आवश्यक और सहायक होते हैं। ये गुण हैं सीखने की निरंतर इच्छा और लगन, विपरित और कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी का दृढ़ पालन, परिवर्तन को अपनाने का साहस, असफलताओं से सीखने और आगे बढ़ने का संकल्प, टीम वर्क और सहयोग की भावना, समय और संसाधनों का अनुशासित उपयोग और ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के लिए करना है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ये गुण न केवल उन्हें एक अच्छा पेशेवर बनाएंगे, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाएंगे। राष्ट्रपति ने छात्रों को याद दिलाया कि शिक्षा केवल जीविका का साधन नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का भी साधन है। उन्होंने कहा कि जिस समाज ने उन्हें शिक्षा प्रदान की है, उसके प्रति वे ऋणी हैं। विकास की राह में पिछड़ चुके लोगों के उत्थान के प्रयास करना इस ऋण को चुकाने का एक तरीका हो सकता है। पिछले दशक में भारत ने प्रौद्योगिकी विकास और आंत्रप्रेन्योर संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज कृषि से लेकर एआई और रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक, युवाओं के लिए अनेक उद्यमशीलता के अवसर उपलब्ध हैं। हमारे उच्च शिक्षा संस्थान अनुसंधान को बढ़ावा देकर, उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करके और सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों को प्रोत्साहित करके इस प्रगति को और गति प्रदान कर सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के वर्षों में पंजाब में मादक द्रव्यों के सेवन की समस्या एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है, जिससे सबसे अधिक प्रभावित युवा हैं। यह समस्या न केवल स्वास्थ्य, बल्कि समाज के सामाजिक, आर्थिक और नैतिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रही है। एक स्वस्थ समाज के लिए इस समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है। इस संदर्भ में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों को युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अगले दो दशक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत का भविष्य उन युवाओं पर निर्भर करता है, जो वैज्ञानिक सोच रखते हैं, जिम्मेदारी से कार्य करते हैं और निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों से अपने छात्रों में इन मूल्यों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने युवा छात्रों से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वे जो भी पेशा चुनें, उनका योगदान राष्ट्र को मजबूत करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने में सहायक हो।
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