एनआईटी के कोर्स में होगा सुधार, उभरती तकनीकों पर रहेगा फोकस: धर्मेंद्र प्रधान

नई दिल्ली, 13 जनवरी (khabarwala24)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान परिषद की 13वीं बैठक को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इस दौरान निर्णय लिया गया कि एनआईटी अपने कोर्स को उभरती प्रौद्योगिकियों के आधार पर पुनर्निर्माण करेंगे।उन्होंने कहा कि अभी एनआईटी में अच्छे कोर्स चल रहे हैं, लेकिन आज की […]

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नई दिल्ली, 13 जनवरी (khabarwala24)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान परिषद की 13वीं बैठक को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इस दौरान निर्णय लिया गया कि एनआईटी अपने कोर्स को उभरती प्रौद्योगिकियों के आधार पर पुनर्निर्माण करेंगे।

उन्होंने कहा कि अभी एनआईटी में अच्छे कोर्स चल रहे हैं, लेकिन आज की आवश्यकता और दुनिया को ध्यान में रखते हुए इनमें सुधार किया जाएगा। पीएचडी अब केवल पब्लिकेशन या वाक्यांश तक सीमित एक उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से पीएचडी पर जोर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किला से एलान किया था कि जॉब क्रिएटर और उद्यमिता बढ़ें। हमारी एनआईटी में स्टार्टअप इकोसिस्टम चल रहा है। उसे गति देने के लिए रिसर्च पार्क खोलने का फैसला लिया गया है। जहां-जहां यह मौजूद है, वहां इसे बढ़ावा दिया जाएगा और जहां नहीं है, वहां इसे खोला जाएगा।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यदि इंजीनियरिंग कोर्स और रिसर्च मातृभाषा में हों तो समझ बढ़ेगी और समस्या-आधारित अध्ययन से समाधान मिलेगा। इस पर भी फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में देश में 7 अंतरराष्ट्रीय इंजीनियर और शोधकर्ता समाज हैं। हर एक अंतरराष्ट्रीय इंजीनियर और शोधकर्ता समाज को एक-एक विषय दिया गया है। सभी के लिए एक-एक कंपनी बनाई जाएगी, जिसके जरिए वे अपने स्टार्टअप इकोसिस्टम को आगे बढ़ाएंगे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत को गति देने के लिए इसे जन आंदोलन में बदल दिया है। इसे आगे बढ़ाने में हमारी एनआईटी और अंतरराष्ट्रीय इंजीनियर व शोधकर्ता समाज प्रमुख कड़ी बनेंगे।

उन्होंने बताया कि आज की बैठक में विशेषज्ञ और सभी संस्थानों के निदेशक मौजूद थे। सभी ने तय किया कि सब मिलकर इसे आगे बढ़ाएंगे। दुनिया में भारत स्किल हब बने, अपनी जरूरत पूरी करने के साथ ही विश्व की जरूरतें पूरी करने की क्षमता भारत के लोगों में है। वे यह काम भारत में रहकर और भारत से बाहर रहकर भी करेंगे।

उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि मातृभाषा में पढ़ाई हो। यह छात्रों पर निर्भर करेगा कि वे किस भाषा में पढ़ना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि अभी 22 भाषाओं में इसे शुरू करने का फैसला लिया गया है। जैसी जरूरत होगी, उसी आधार पर आगे फैसले लिए जाएंगे।

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