पटना, 25 जनवरी (khabarwala24)। कांग्रेस के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पार्टी छोड़ने पर जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की जिस तरह से हरकत दिखाई दे रही है, उससे पता चलता है कि ये भ्रष्टाचारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने समाचार एजेंसी khabarwala24 से बात करते हुए कहा, “कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी मामले उनकी अपनी चिंता हैं, लेकिन शकील अहमद और नसीमउद्दीन सिद्दीकी के बयानों से पता चलता है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के नाम पर भ्रष्ट लोगों के साथ जो राजनीतिक सौदे किए गए थे, अब उनके बुरे नतीजे सामने आ रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं की हरकत की वजह से ही पार्टी की नाव डूब रही है। लोग धीरे-धीरे पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं। कांग्रेस में वही लोग सुरक्षित हैं जो गांधी परिवार के हिसाब से काम करते हैं और उनके कहे में रहते हैं।
शनिवार को नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इस्तीफा भेजकर पार्टी छोड़ने को व्यक्तिगत कारणों की वजह बताया था। अपने लिखित इस्तीफे पत्र में सिद्दीकी ने कहा कि वे ‘अपरिहार्य कारणों’ से अपनी प्राथमिक सदस्यता और सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों का त्याग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के किसी भी पदाधिकारी के खिलाफ उनकी कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि जिन उद्देश्यों के लिए वे पार्टी में शामिल हुए थे, वे पूरे नहीं हो रहे थे।
राष्ट्रीय जनता दल की कार्यकारिणी बैठक पर निशाना साधते हुए नीरज कुमार ने कहा, “राष्ट्रीय जनता दल को होटलों में कार्यकारिणी बैठक करने की कोई जरूरत नहीं है। वे इसे घर पर कर सकते हैं। पार्टी के अपने अंदरूनी मामले हैं। सर्कुलर रोड पर 89000 स्क्वायर फीट की प्रॉपर्टी खाली करनी होगी। इस पार्टी में आपस के लोग ही हर पद पर बैठे हैं, इसीलिए बाहर जाने की क्या जरूरत है?
उन्होंने कहा कि अगर ये लोग पार्टी में कोई बदलाव करेंगे तो अपने ही परिवार के किसी सदस्य को उसकी जिम्मेदारी देंगे। रोहिणी आचार्य के साथ जिस तरह से व्यवहार किया है, उसका भी जवाब कार्यकारिणी बैठक को देना होगा। बिहार में आने वाले कई सालों तक इनकी पार्टी कहीं नहीं दिखाई देगी।
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए नीरज कुमार ने कहा, “चुनावी हार के बाद, कांग्रेस अपना वोटर बेस कम होने की बात मानने के बजाय दूसरों पर आरोप लगाती है। जिन राज्यों में कांग्रेस जीती, वहां भारत निर्वाचन आयोग को निष्पक्ष माना जाता है, लेकिन हारने पर आलोचना शुरू हो जाती है।”
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