गांधीनगर, 6 फरवरी (khabarwala24)। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारत की सबसे रणनीतिक आर्थिक साझेदारियों में से एक के रूप में उभरा है। यह समझौता भारत के व्यापार, नवाचार और वैश्विक बाजारों में विश्वसनीय भागीदारी को नई गति देने वाला है। वर्तमान में ईयू को भारत का निर्यात लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपए (यूएसडी 16.6 बिलियन) का है, जिसमें एफटीए के बाद उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
भारत को यूरोपीय बाजारों में 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों और 99.5 प्रतिशत व्यापार मूल्य पर विशेष वरीयतापूर्ण पहुंच मिलेगी। 70.4 प्रतिशत टैरिफ लाइनें, जो भारत के 90.7 फीसद निर्यात को कवर करती हैं, उनमें तुरंत शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा। इनमें वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, चाय, कॉफी, मसाले, खेल सामग्री, खिलौने, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, ऑटोमोबाइल, इस्पात, दवाइयां और रसायन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में गुजरात से ईयू को हुए कुल निर्यात में इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी लगभग 25% रही है। ईयू, वस्त्र और परिधान के क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। एफटीए लागू होने के बाद वस्त्र एवं कपड़ों पर 12% तक टैरिफ में कमी और सभी टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क मिलने से ईयू के यूएसडी 263.5 बिलियन के आयात बाजार तक पहुंच आसान होगी। भारत का कुल वस्त्र एवं परिधान निर्यात यूएसडी 36.7 बिलियन है, जिसमें से यूएसडी 7.2 बिलियन ईयू को जाता है।
ईयू को होने वाले निर्यात में रेडीमेड गारमेंट्स (60%), कॉटन टेक्सटाइल (17%) और एमएमएफ व सिंथेटिक टेक्सटाइल (12%) की प्रमुख हिस्सेदारी है। गुजरात का सूरत, जो एमएमएफ और सिंथेटिक वस्त्र उत्पादन का प्रमुख केंद्र है, इस नए अवसर से सबसे अधिक लाभ उठाने की स्थिति में है।
इसी तरह, रत्न एवं आभूषण क्षेत्र, खासकर एमएसएमई आधारित इकाइयां, ईयू बाजार में नई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने जा रही हैं। सूरत, जो विश्व के सबसे बड़े हीरा प्रसंस्करण केंद्रों में से एक है, 5,000 से अधिक इकाइयों का प्रमुख हब है। ईयू के यूएसडी 79.2 बिलियन के आयात बाजार तक विशेष पहुंच भारत के यूएसडी 2.7 बिलियन आभूषण निर्यात को नई गति दे सकती है। साथ ही, सूरत एसईजी में 250 से अधिक इकाइयां आभूषण, हीरा और वस्त्र क्षेत्र में सक्रिय हैं, जो इन नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए तैयार हैं।
भारत-ईयू के बीच एफटीए लागू होने के बाद समुद्री निर्यात क्षेत्र भी बड़े सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। वर्तमान में ईयू को भारत का समुद्री निर्यात यूएसडी 1 बिलियन है। एफटीए के बाद 26% तक टैरिफ में कमी और 100% व्यापार मूल्य कवरेज से भारतीय हितधारकों का ईयू के यूएसडी 53.6 बिलियन समुद्री आयात बाजार तक पहुंच आसान होगी। इसका सीधा लाभ गुजरात के वैल्यू-ऐडेड समुद्री खाद्य उत्पादों को मिलने की संभावना है।
इतना ही नहीं, भारत 2047 तक वैश्विक रसायन बाजार में 12% हिस्सेदारी और यूएसडी 1 ट्रिलियन केमिकल निर्माण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत-ईयू के बीच एफटीए के अंतर्गत भारत के 97.5% रसायन निर्यात पर शून्य शुल्क लागू होगा, जिससे 12.8% तक टैरिफ समाप्त होंगे। दक्षिण गुजरात, विशेषकर सूरत आर्थिक क्षेत्र, गुजरात के रसायन जीवीए में 70% योगदान देता है। दहेज, हजीरा, मुंद्रा और जेएनपीटी जैसे प्रमुख बंदरगाहों की निकटता इस क्षेत्र को निर्यात विस्तार के लिए विशेष रणनीतिक लाभ देती है।
अप्रैल 2026 में सूरत में आयोजित होने वाला वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट (वीजीआरसी) दक्षिण गुजरात उद्योगों के लिए एफटीए से खुले अवसरों को व्यवहारिक रूप देने का मंच बनेगा। वस्त्र, रत्न-आभूषण, रसायन-पेट्रोकेमिकल और समुद्री उत्पाद जैसे उच्च-विकास सेक्टर ईयू की बढ़ती मांग से सीधे जुड़ेंगे। 99.5% व्यापार मूल्य पर टैरिफ समाप्ति के साथ, यह सम्मेलन क्षेत्रीय उद्योगों को निर्यात वृद्धि की दिशा में ठोस और समयोचित कदम उठाने का अवसर प्रदान करेगा।
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