स्वामी सहजानंद ने किसानों को आत्मसम्मान और संगठन की ताकत से कराया परिचित: रामकृपाल यादव

पटना, 15 फरवरी (khabarwala24)। बिहार के कृषि मंत्री और भाजपा के नेता रामकृपाल यादव ने रविवार को कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती के सिद्धांत आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं, जब किसान, खेतिहर मजदूर और ग्रामीण समाज आर्थिक व सामाजिक दबावों से जूझ रहे हैं।उन्होंने कहा कि सहजानंद ने किसानों […]

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पटना, 15 फरवरी (khabarwala24)। बिहार के कृषि मंत्री और भाजपा के नेता रामकृपाल यादव ने रविवार को कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती के सिद्धांत आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं, जब किसान, खेतिहर मजदूर और ग्रामीण समाज आर्थिक व सामाजिक दबावों से जूझ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सहजानंद ने किसानों को केवल अधिकारों की बात नहीं सिखाई, बल्कि आत्मसम्मान और संगठन की ताकत से परिचित कराया।

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कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने रविवार को स्वामी सहजानंद सरस्वती स्मारक समिति द्वारा आयोजित स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम सभी को उनके विचारों से सीख लेनी चाहिए। स्वामी सहजानंद सरस्वती स्मारक परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक महापुरुष को श्रद्धांजलि अर्पित करना नहीं, बल्कि उनके विचारों को आज की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में पुनः जीवित करना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मंत्री डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती केवल एक संत या समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि वे भारतीय किसान चेतना के वैचारिक स्तंभ थे। उन्होंने जमींदारी व्यवस्था, सामंती शोषण और सामाजिक असमानता के विरुद्ध संगठित संघर्ष को वैचारिक दिशा दी। उनका पूरा जीवन इस बात का प्रमाण है कि सामाजिक परिवर्तन बिना संघर्ष के संभव नहीं होता।

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम सुन्दर शरण ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती का विचार लोकतंत्र की उस आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है, जहां सत्ता नहीं बल्कि समाज का अंतिम व्यक्ति केंद्र में होता है।

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उन्होंने चेताया कि यदि आज की पीढ़ी सहजानंद जी के विचारों से कटती चली गई, तो सामाजिक न्याय केवल नारा बनकर रह जाएगा। कार्यक्रम में किसानों, मज़दूरों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह संकल्प लिया कि वे स्वामी सहजानंद सरस्वती की वैचारिक विरासत को केवल स्मृति तक सीमित नहीं रहने देंगे, बल्कि उसे संगठन, संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन के व्यवहारिक आंदोलन में रूपांतरित करेंगे।

समारोह का समापन इस सामूहिक प्रण के साथ हुआ कि सामाजिक न्याय, किसान अधिकार और मानवीय गरिमा की लड़ाई को हर परिस्थिति में आगे बढ़ाया जाएगा, क्योंकि यही स्वामी सहजानंद सरस्वती को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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