नई दिल्ली, 9 फरवरी (khabarwala24)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण के दूसरे एपिसोड में कोयंबटूर के छात्रों के साथ बातचीत की। पीएम मोदी ने कहा कि तमिलनाडु के छात्रों की ऊर्जा और जिज्ञासा ने बहुत प्रभावित किया है।
‘परीक्षा पे चर्चा’ के दूसरे एपिसोड की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस बार कार्यक्रम कुछ अलग और खास है। बहुत सारे छात्रों ने मुझे ये सुझाव भेजा था कि देश के अलग अलग हिस्सों में भी परीक्षा पे चर्चा होनी चाहिए। तो इस बार मैंने देश के अलग अलग हिस्सों में भी छात्रों के साथ बैठकर ‘परीक्षा पे चर्चा’ की। इसी क्रम में पीएम मोदी ने सबसे पहले तमिलनाडु के कोयंबटूर के छात्रों से चर्चा की।
सबसे पहले कोयंबटूर के छात्रों से चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मैं कई सालों से ‘परीक्षा पे चर्चा’ के जरिए क्लास 10 से 12 तक के छात्रों से बातचीत कर रहा हूं। मैं उनसे सीखने के लिए बात करता हूं। जब भी मैं लोगों से मिलता हूं, तो वे स्टार्टअप्स के बारे में बात करते हैं।”
उन्होने कहा कि सबसे पहले आपको (छात्रों को) पता होना चाहिए कि आप क्या करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए कुछ स्टार्टअप टेक्नोलॉजी पर फोकस करते हैं। अगर आपके दोस्त अलग-अलग फील्ड में एक्सपर्ट हैं, तो आप उनके साथ एक छोटा स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं।
पीएम मोदी ने छात्रों को टिप्स देते हुए कहा, “अनुशासन और मोटिवेशन ये दोनों ही जीवन में महत्वपूर्ण हैं। अगर अनुशासन ही नहीं है, तो कितना भी इंस्पिरेशन हो, वो किसी काम नहीं आएगा। जीवन में अनुशासन बहुत अनिवार्य है। ये इंस्पिरेशन में ‘सोने पर सुहागा’ का काम करता है। अगर अनुशासन ही नहीं है, तो कितना ही इंस्पिरेशन हो, वो बोझ बन जाता है और निराशा पैदा करता है।”
पढ़ाई और अपने पैशन से जुड़े एक छात्रा के सवाल का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “पढ़ाई और अपने पैशन को अलग-अलग न समझें। उदाहरण के लिए अगर आपको आर्ट में दिलचस्पी है और आप साइंस का कोई टॉपिक पढ़ रहे हैं, तो आप उससे जुड़ी कोई तस्वीर बनाना शुरू कर सकते हैं। इस तरह, आप दोनों की प्रैक्टिस कर पाएंगे।”
युवा छात्र ‘विकसित भारत’ में कैसे योगदान दे सकते हैं? एक अन्य छात्रा के इस सवाल की पीएम मोदी ने प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि स्कूली छात्र विकसित भारत के बारे में सोच रहे हैं। 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लिए अगर हम एक विकसित देश बनना चाहते हैं, तो हमें सिर्फ बातें नहीं करनी हैं, बल्कि विकसित देशों की आदतें भी अपनानी होंगी।”
प्रधानमंत्री मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि सफाई बनाए रखना और नियमों का पालन करना। अगर मैं ऐसा करता हूं, तो इसका मतलब है कि मैं योगदान दे रहा हूं।
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