कोलकाता, 8 फरवरी (khabarwala24)। बंगाल सरकार के कर्मचारियों के संयुक्त मंच के सदस्यों ने रविवार को कोलकाता की सड़कों पर उतरकर ममता बनर्जी सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार लंबित 25 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) जारी करने का दबाव बनाया।
प्रदर्शनकारियों ने मध्य कोलकाता के सुबोध मल्लिक चौक से रानी रश्मोनी रोड तक जुलूस निकाला।
भाजपा सांसद सौमित्र खान भी कर्मचारियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए जुलूस में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद, राज्य सरकार लंबित महंगाई भत्ता (डीए) का भुगतान करने में आनाकानी कर रही है।
मंच के सदस्यों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी डीए के संबंध में अभी तक कोई घोषणा नहीं की गई है। सरकारी कर्मचारी एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं ताकि सरकार इस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर न करे।
संयुक्त मंच के संयोजक भास्कर घोष ने कहा, “सरकार को अब अदालत के आदेश का पालन करना चाहिए। यह महंगाई भत्ता सिर्फ कर्मचारियों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि बाजार में भी इसका प्रचलन होगा। इसके साथ ही, श्रम का मूल्य भी बढ़ेगा। राज्य सरकार द्वारा लंबित महंगाई भत्ता का भुगतान न करने के बाद यह पूरा चक्र टूट गया है।”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 5 फरवरी को राज्य विधानसभा में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा था, “इस फैसले को देने वाली समिति में सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीश और सीएजी का एक सदस्य शामिल था। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं था। इसलिए, इस पर विचार करने और वकीलों से परामर्श करने के बाद, हमने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया है। वे इस मामले पर विचार और समीक्षा करेंगे। हम उनकी सिफारिशों के अनुसार आगे बढ़ेंगे।”
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ममता बनर्जी सरकार को राज्य सरकार के कर्मचारियों को देय महंगाई भत्ता का 25 प्रतिशत 31 मार्च तक चुकाने का आदेश दिया था।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने राज्य सरकार को शेष 75 प्रतिशत महंगाई भत्ता पर निर्णय लेने के लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने का भी निर्देश दिया। इसी बेंच ने पिछले साल अगस्त में इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पिछले साल 16 मई को पारित एक अंतरिम आदेश में, सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ता का 25 प्रतिशत तीन महीने के भीतर भुगतान का निर्देश दिया था। ममता बनर्जी सरकार ने बाद में धन की कमी का हवाला देते हुए सर्वोच्च न्यायालय से समय सीमा छह महीने बढ़ाने की अपील की थी।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।


