शिवमोग्गा, 30 जनवरी (khabarwala24)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट में कर्नाटक के साथ लगातार सौतेला रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मुद्दे पर आवाज न उठाने के लिए राज्य के भाजपा सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों की आलोचना की है।
शिवकुमार ने शिवमोग्गा सर्किट हाउस के पास मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “केंद्र सरकार ने बजट में हमेशा कर्नाटक के साथ भेदभाव किया है। भाजपा सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों ने इस बारे में कुछ नहीं कहा है। वे ऐसे व्यवहार कर रहे हैं मानो कर्नाटक का कोई महत्व ही न हो। जैसे वह सिर्फ नाम के लिए मौजूद हैं, काम में उनका कोई योगदान नहीं है।”
केंद्रीय बजट से अपेक्षाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि केंद्र अपने वादों को पूरा करने में विफल रहा है। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार ने भद्रा अपर परियोजना के लिए 5,300 करोड़ रुपए देने का वादा किया था, लेकिन अभी तक धनराशि जारी नहीं की है।”
उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले भाजपा के पोस्टर अभियान और आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर के इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस ने भी भाजपा से जुड़े कई घोटालों का पर्दाफाश किया है।
उन्होंने कहा, “बीते समय के कई आरोप हैं, जिनमें कोविड काल से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। हम उन्हें भी सामने ला सकते हैं। वे किसी न किसी मुद्दे को भुनाने के लिए राजनीति कर रहे हैं। जांच पूरी होने दीजिए।”
मनरेगा पर चर्चा के लिए विधानसभा के विशेष सत्र के विस्तार के संबंध में शिवकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सदन में यह मुद्दा उठाया था और अध्यक्ष ने इसे कार्य सलाहकार समिति के समक्ष रखने का सुझाव दिया था। इसके अनुसार ही गुरुवार को इस मामले पर चर्चा हुई।
हम यह स्पष्ट करेंगे कि वीबी जी राम जी अधिनियम को क्यों वापस लिया जाना चाहिए। वर्तमान स्थिति में इसे किसी भी राज्य में लागू करना संभव नहीं है। यह कृषि का चरम मौसम है और किसान पहले से ही कृषि कार्य के माध्यम से मजदूरी कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त करने से किसी को भी लाभ नहीं होगा।
डीके शिवकुमार ने कहा कि केंद्र सरकार भले ही कार्यदिवसों की संख्या बढ़ाकर 125 करने का दावा कर रही हो, लेकिन साल के अन्य समय में इतने दिनों तक काम उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा, “प्रत्येक ग्राम पंचायत को 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपए तक का नुकसान हो रहा है और यहां तक कि जॉब कार्ड धारकों को भी हानि हो रही है।”
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