कांग्रेस का अंग्रेजों से फ्रेंडली मैच रहा है : प्रतुल शाह देव

रांची, 6 फरवरी (khabarwala24)। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने देश की आजादी में कांग्रेस के योगदान पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने देश की आजादी में कोई योगदान नहीं दिया, बल्कि ये लोग अंग्रेजों के साथ फ्रेंडली मैच खेल रहे थे।उन्होंने शुक्रवार को समाचार एजेंसी khabarwala24 से बातचीत में कहा कि […]

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रांची, 6 फरवरी (khabarwala24)। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने देश की आजादी में कांग्रेस के योगदान पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने देश की आजादी में कोई योगदान नहीं दिया, बल्कि ये लोग अंग्रेजों के साथ फ्रेंडली मैच खेल रहे थे।

उन्होंने शुक्रवार को समाचार एजेंसी khabarwala24 से बातचीत में कहा कि पंडित नेहरू जब जेल में थे, तो उनका जेल ही तीन चार कमरे का हुआ करता था। उनके कपड़े पेरिस धुलने जाया करते थे। अगर 1942 के ‘भारत छोड़ों’ आंदोलन को छोड़ दें, तो इन लोगों ने आजादी तक कोई भी बड़ा आंदोलन नहीं किया। इसके बाद इन लोगों ने अंग्रेजों से हाथ मिला लिया था।

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भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अगर कांग्रेस के लाला लाजपत राय को छोड़ दिया जाए, तो आप मुझे कांग्रेस के किसी एक नेता का नाम बता दीजिए, जिसने देश की आजादी में कोई बड़ा योगदान दिया हो। सच्चाई यह है कि इन लोगों ने आज तक देश की आजादी में कोई योगदान नहीं दिया। इसके विपरीत, ये लोग अंग्रेजी के साथ अपनी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए फ्रेंडली मैच खेल रहे थे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोगों ने क्वीन विक्टोरिया के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए शपथ भी ली थी। इन लोगों से आप देशभक्ति की क्या ही उम्मीद कर सकते हैं। सच्चाई यह है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कैबिनेट मिशन के तहत काम किया था। उनका लक्ष्य सिर्फ देश की आजादी के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होना था। इन लोगों का देश की आजादी में किसी भी प्रकार का योगदान नहीं रहा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग बार-बार यह दावा करते हैं कि हमने देश की आजादी में बड़ा योगदान दिया है, तो मेरा सीधा सा सवाल है कि 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद भी आखिर क्यों माउंटबेटन भारत के वायसराय बने रहे, जबकि कायदे से उन्हें देश को आजादी मिलने के बाद तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए था।

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उन्होंने कहा कि मेरा सीधा सा सवाल है कि 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद भी आखिर क्यों कोई अंग्रेज भारतीय सेना का जनरल बना रहा, वो भी पांच सालों तक। हद तो नेवी के साथ हो गई। नेवी के जनरल पद पर पांच साल तक अंग्रेजी हुकूमत रही, तो इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस का अंग्रेजों से पुराना रिश्ता रहा है।

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