नई दिल्ली, 2 फरवरी (khabarwala24)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इस बजट में आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्सा और मेडिकल टूरिज्म को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं का ऐलान किया गया। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) के डायरेक्टर प्रो. पीके. प्रजापति ने बजट की तारीफ करते हुए इसे आयुर्वेद और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया।
khabarwala24 से बात करते हुए एआईआईए के डायरेक्टर प्रो. पीके. प्रजापति ने कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में आयुर्वेद, औषधियों की गुणवत्ता और मेडिकल टूरिज्म को ध्यान में रखते हुए जो प्रावधान किए हैं, वह समय की मांग के अनुसार काफी महत्वपूर्ण हैं। तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और आयुर्वेद संस्थानों को मंजूरी देने से देश में इलाज की गुणवत्ता और उपलब्धता दोनों में सुधार होगा।”
उन्होंने कहा, ”भारत में मॉडर्न चिकित्सा, यूनानी, आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी विविध चिकित्सा प्रणालियों के लिए बहुत से मरीज विदेश से आते हैं। यह बजट उन सभी मरीजों और चिकित्सा पद्धतियों के लिए मददगार साबित होगा। आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक इलाज को वैज्ञानिक शोध से भी समर्थन प्राप्त है, और अब बजट में इन चिकित्सा पद्धतियों के विकास और विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है।”
उन्होंने बताया कि बजट में शरीर, आत्मा और मानसिक स्वास्थ्य को जोड़ने वाले आयुर्वेदिक इलाजों के लिए विशेष योजनाओं का प्रावधान किया गया है।
प्रो. प्रजापति ने कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के दौरान 2014 से आयुर्वेद के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। मैं आयुष मंत्रालय, मंत्री और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अथक प्रयासों की सराहना करता हूं, क्योंकि उनके सहयोग और मार्गदर्शन के बिना यह संभव नहीं होता। यह बजट आयुर्वेदिक शिक्षा और अनुसंधान को मजबूत करेगा, साथ ही भारत को मेडिकल टूरिज्म के लिए आकर्षक केंद्र भी बनाएगा।”
बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र में तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की स्थापना और सात पुराने संस्थानों का अपग्रेडेशन भी शामिल है। इसके अलावा, पूरे देश में 1,000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स बनाए जाने की योजना है। जिला अस्पतालों और इमरजेंसी वार्डों को अपग्रेड कर मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।
पांच नए क्षेत्रीय मेडिकल हब भी बनाए जाएंगे, जहां मेडिकल सेवा, रिसर्च और प्रशिक्षण पर काम होगा। इसके अलावा, तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस की स्थापना की जाएगी। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए संस्थानों और सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
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