6 फरवरी का पंचांग: फाल्गुन कृष्ण की पंचमी तिथि, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

नई दिल्ली, 5 फरवरी (khabarwala24)। सनातन धर्म में पंचांग का बेहद महत्व है। पंचांग न केवल पूजा-पाठ बल्कि दैनिक कार्य , सूर्योदय, सूर्यास्त की जानकारी देता है, बल्कि दिन के शुभ-अशुभ मुहूर्त भी बताता है। 6 फरवरी शुक्रवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है।शुक्रवार को हस्त नक्षत्र और चंद्रमा कन्या राशि […]

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नई दिल्ली, 5 फरवरी (khabarwala24)। सनातन धर्म में पंचांग का बेहद महत्व है। पंचांग न केवल पूजा-पाठ बल्कि दैनिक कार्य , सूर्योदय, सूर्यास्त की जानकारी देता है, बल्कि दिन के शुभ-अशुभ मुहूर्त भी बताता है। 6 फरवरी शुक्रवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है।

शुक्रवार को हस्त नक्षत्र और चंद्रमा कन्या राशि में रहेंगे, जो कुछ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है, लेकिन राहुकाल और अन्य अशुभ कालों का विचार भी महत्वपूर्ण है। पंचांग के पांच मुख्य तत्वों में तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार हैं।

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दृक पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 1 बजकर 18 मिनट से रात 6 फरवरी तक रहेगी। नक्षत्र हस्त है, जो 12 बजकर 23 मिनट से 7 फरवरी तक की रात तक रहेगा। चंद्रमा कन्या राशि में संचरण करेंगे। सूर्योदय 7 बजकर 6 मिनट और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 4 मिनट पर होगा।

शुक्रवार को योग धृति 11 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। करण कौलव दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक और फिर तैतिल रात 1 बजकर 18 मिनट से 7 फरवरी तक रहेगा।

शुभ कार्य करने वालों के लिए महत्वपूर्ण समय का विचार करना चाहिए, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 22 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 25 मिनट से 3 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से 6 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। अमृत काल शाम 6 बजकर 2 मिनट से 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।

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धर्म शास्त्र के अनुसार, अशुभ समय में किए गए कार्य फलित नहीं होते ऐसे में इनसे बचना चाहिए। शुक्रवार को राहुकाल सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक यमगंड दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। वहीं, गुलिक काल सुबह 8 बजकर 29 मिनट से 9 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शुभ कार्य करने की मनाही रहती है।

इसके अलावा, शुक्रवार विष्णुप्रिया को समर्पित है। विधि-विधान से गई पूजा से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और सुख-समृद्धि का वरदान देती हैं।

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