बिहार: छात्र नेता ने ‘बीएसएससी’ अध्यक्ष विवाद में भ्रष्ट गिरोह के दबाव का आरोप लगाया

पटना, 7 जनवरी (khabarwala24)। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इसके अध्यक्ष आलोक राज ने 31 दिसंबर, 2025 को पदभार संभालने के महज छह दिन बाद अचानक इस्तीफा दे दिया।अपनी बेदाग छवि और ईमानदारी के लिए जाने जाने वाले इस अधिकारी के अचानक इस्तीफे ने छात्र संगठनों की […]

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पटना, 7 जनवरी (khabarwala24)। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इसके अध्यक्ष आलोक राज ने 31 दिसंबर, 2025 को पदभार संभालने के महज छह दिन बाद अचानक इस्तीफा दे दिया।

अपनी बेदाग छवि और ईमानदारी के लिए जाने जाने वाले इस अधिकारी के अचानक इस्तीफे ने छात्र संगठनों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है।

तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए छात्र नेता दिलीप कुमार ने आरोप लगाया कि आलोक राज को स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति नहीं दी गई और उन पर आयोग के भीतर और आसपास सक्रिय एक भ्रष्ट गिरोह का भारी दबाव था।

एक वीडियो संदेश में दिलीप कुमार ने कहा कि आलोक राज का इस्तीफा भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के साथ समझौता करने से उनके इनकार को दर्शाता है।

उन्होंने दावा किया कि पूर्व अध्यक्ष ने अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए पद छोड़ दिया, क्योंकि उन पर कथित तौर पर गलत और अनैतिक निर्णय लेने का दबाव डाला जा रहा था।

गंभीर आरोप लगाते हुए दिलीप कुमार ने दावा किया कि ऐसी व्यापक अफवाहें थीं कि बिहार का एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता बीएसएससी पर आगामी परीक्षाओं (द्वितीय इंटर-लेवल और सीजीएल-4 परीक्षाएं) को पहले से ही ब्लैकलिस्टेड निजी एजेंसी के माध्यम से ऑनलाइन आयोजित करने के लिए दबाव डाल रहा था।

उन्होंने बताया कि चूंकि बिहार सरकार के पास वर्तमान में अपनी ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली नहीं है, इसलिए निजी एजेंसियों पर निर्भरता धांधली, हेराफेरी और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है।

छात्र नेता के अनुसार, घटनाक्रम से बीएसएससी के अंतर्गत 24,000 से अधिक पदों की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का संकेत मिलता है।

दिलीप कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सीधे अपील करते हुए उनसे सुशासन की अपनी छवि को बचाने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

उन्होंने उन परिस्थितियों की गहन जांच की मांग की जिनके कारण कथित तौर पर एक ईमानदार अधिकारी को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा और आलोक राज के इस्तीफे के पीछे किसके दबाव का जिक्र किया।

आंदोलन की चेतावनी देते हुए दिलीप कुमार ने कहा कि अगर आलोक राज जैसे ईमानदार अधिकारियों को बहाल नहीं किया जाता है या अगर एक पारदर्शी और विश्वसनीय भर्ती प्रणाली लागू नहीं की जाती है, तो बिहार भर में लाखों छात्र सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

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