चारधाम में गैर-हिंदुओं पर प्रतिबंध का वीएचपी ने किया स्वागत, फैसले को सभी हिंदू तीर्थों पर लागू करने की मांग

नई दिल्ली, 27 जनवरी (khabarwala24)। उत्तराखंड के चारधाम तीर्थों, गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ, में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लग रहे प्रतिबंधों को लेकर विवाद तेज हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है और मांग की है कि भारत के सभी पवित्र हिंदू तीर्थों में गैर-हिंदुओं का […]

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नई दिल्ली, 27 जनवरी (khabarwala24)। उत्तराखंड के चारधाम तीर्थों, गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ, में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लग रहे प्रतिबंधों को लेकर विवाद तेज हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है और मांग की है कि भारत के सभी पवित्र हिंदू तीर्थों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित हो। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने प्रेस वक्तव्य में कहा कि यह कदम धार्मिक पवित्रता और परंपराओं की रक्षा के लिए जरूरी है।

डॉ. जैन ने कहा, “गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर नियंत्रण के निर्णय का वीएचपी स्वागत करता है। केवल इन तीन स्थानों पर ही नहीं, देश के सभी हिंदू तीर्थों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित होना चाहिए।” उन्होंने अयोध्या में हाल ही में एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक जिहादी द्वारा पवित्रता भंग करने का प्रयास अक्षम्य अपराध है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी द्वारा इस प्रतिबंध का विरोध करने पर डॉ. जैन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मदनी जी सद्भाव की बात करते हैं, लेकिन विष वमन करते हैं। सद्भाव तब बनेगा, जब वे मक्का में हनुमान चालीसा पढ़ने की हिम्मत दिखाएं। अयोध्या हमारे लिए उतना पवित्र है जितना मक्का उनके लिए। जब मक्का में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश नहीं, तो हमारे तीर्थों में कैसे?”

डॉ. जैन ने आरोप लगाया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद खिलाफत आंदोलन से जन्मी है और हमेशा मुस्लिम समाज में कट्टरता फैलाती रही है। उन्होंने देवबंद को आतंकवादियों का जन्मस्थान बताते हुए कहा कि जमीयत वहाबी विचारधारा का पोषण करती है।

उन्होंने मंदिरों पर हमले, शोभायात्राओं पर पथराव और महिलाओं पर अत्याचार के उदाहरण देते हुए कहा कि जिहादी तत्वों द्वारा हिंदुओं पर हमले आम हैं, लेकिन मॉब लिंचिंग हिंदुओं का स्वभाव नहीं, जिहादी स्वभाव है। उन्होंने पिछले साल से जुड़ी 187 हिंदुओं की सूची का हवाला दिया, जिन्हें भीड़ ने मार डाला, और इस साल बाड़मेर के खेताराम भील, भीलवाड़ा के सीताराम, बरेली के तेजाराम और गुजरात के जयंती भाटी जैसे मामलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जल्द ही सैकड़ों हिंदुओं की मॉब लिंचिंग की सूची जारी की जाएगी।

डॉ. जैन ने कहा कि पूरी दुनिया जिहादी उन्माद से पीड़ित है। अमेरिका, ब्रिटेन में भी सिर तन से जुदा के नारे लगते हैं, फिर सद्भाव की बात की जाती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जमीयत आतंकवादी घटनाओं के आरोपियों के केस लड़ती है और फिर सद्भाव की बात करती है। उन्होंने कहा, “भारत हिंदू राष्ट्र है, इसलिए सभी धर्म के लोग रह पाते हैं। मुस्लिम देशों में भी आपस में इतना सौहार्द नहीं, जितना हिंदू रखते हैं। अपनी भावनाओं की कद्र करें, अपमान न करें।”

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