आंतरिक शांति की कुंजी ‘गहरी सांस’ लेना, जानें इसके फायदे

नई दिल्ली, 16 जनवरी (khabarwala24)। स्वस्थ शरीर और शांत मन से जीवन सुखमय बनता है, लेकिन तनाव और व्यस्तता में एक छोटी समस्या भी बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। आयुर्वेद ऐसी स्थिति में छोटी-छोटी आदतों से बड़ा फर्क लाने की सलाह देता है। इनमें सबसे आसान और प्रभावी है गहरी सांस लेना। आयुर्वेद इसे […]

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नई दिल्ली, 16 जनवरी (khabarwala24)। स्वस्थ शरीर और शांत मन से जीवन सुखमय बनता है, लेकिन तनाव और व्यस्तता में एक छोटी समस्या भी बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। आयुर्वेद ऐसी स्थिति में छोटी-छोटी आदतों से बड़ा फर्क लाने की सलाह देता है। इनमें सबसे आसान और प्रभावी है गहरी सांस लेना। आयुर्वेद इसे प्राणायाम का मूल आधार मानता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, रोजाना कुछ मिनट गहरी सांस लेने से तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और पाचन सुधरता है। साथ ही, शरीर को अनगिनत लाभ भी मिलते हैं। गहरी सांस को दीर्घ श्वास या डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग भी कहते हैं। यह शरीर में ऊर्जा बढ़ाती है।

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गहरी सांस, प्राण (जीवन ऊर्जा) को नियंत्रित कर शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करती है। रोजाना कुछ मिनट गहरी सांस लेने से तीनों दोष (वात, पित्त, कफ) संतुलित होते हैं, तनाव कम होता है और जीवन में शांति के साथ ऊर्जा बढ़ती है।

गहरी सांस लेना जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार आजकल ज्यादातर लोग छाती से उथली सांस लेते हैं, जो तनाव, चिंता और असंतुलन का कारण बनती है। आयुर्वेद के अनुसार सांस वात दोष को बढ़ाती है और मन को बेचैन रखती है। गहरी सांस (पेट तक) लेने से पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है, जो शरीर को ‘आराम और पुनर्स्थापना’ मोड में ले जाता है। यह प्राण को बेहतर प्रवाह देता है, ऑक्सीजन बढ़ाता है और पूरे शरीर को पोषण पहुंचाता है।

गहरी सांस लेने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं। इससे तनाव और चिंता कम होती है। कोर्टिसोल हार्मोन घटता है, मन शांत होता है और भावनात्मक संतुलन आता है। गहरी सांस से पाचन क्रिया में सुधार होता है। डायफ्राम की मसाज से अग्नि तेज होती है। कब्ज, गैस और अपच दूर होती है। इसके अभ्यास से इम्युनिटी मजबूत होती है और बेहतर ऑक्सीजनेशन से पूरा शरीर डिटॉक्स होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

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यही नहीं, इससे हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है। हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहते हैं। अनिद्रा की समस्या दूर होती है और थकान कम होती है। इससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। सांस संबंधी समस्याएं कम होती हैं। गहरी सांस एकाग्रता बढ़ाती है, क्रोध नियंत्रित करती है और सकारात्मक सोच लाती है। आयुर्वेद में इसे वात दोष को शांत करने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है, जो आज के तनावपूर्ण जीवन में बहुत जरूरी है।

सुबह उठकर या दिन में 5-10 मिनट बैठकर, नाक से धीरे पेट फुलाकर सांस अंदर लें (4-6 सेकंड), 2-4 सेकंड रोकें, फिर धीरे बाहर छोड़ें (6-8 सेकंड)। इसे 10-20 बार दोहराएं।

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