नई दिल्ली, 28 फरवरी (khabarwala24)। शारीरिक तरीके से खुद को फिट रखने के लिए लोग जिम का सहारा लेते हैं और खूब कसरत करते हैं।
तन का ख्याल रखने के लिए जिम है, लेकिन मन का ख्याल रखने के लिए क्या करें? तन की तरह मन को भी स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है। मन को स्वस्थ रखने के लिए योग का सहारा लिया जा सकता है, जिसमें मन की मुख्य 5 वृत्तियों के बारे में बारीकी से समझाया गया है।
अक्सर हम अपने ही विचारों में उलझे रहते हैं और मन को तनाव घेर लेता है। मन की परेशानी तन को भी बीमार सकती है, इसलिए योग में मन की मुख्य 5 वृत्तियाँ के बारे में समझाया गया है, जिसकी सहायता से जिंदगी और तनाव दोनों को मैनेज किया जा सकता है। चित्त वृत्ति निरोध का सीधा अर्थ है मन का अध्ययन करना और मन को हर प्रकार के बोझ से मुक्त करता है। इसके लिए योग में 5 चित्त वृत्तियां का जिक्र किया गया है, जिसमें प्रमाणवृत्ति, विपर्ययवृत्ति, विकल्प वृत्ति, निद्रावृत्ति और स्मृतिवृत्ति शामिल है।
आयुष मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक, प्रमाणवृत्ति ध्यान का पहला चरण है, जिसमें मन को सही ज्ञान और धारणा की स्थिति में लाया जाता है, जिसमें आंखों और कानों से ज्ञान का सीधा अनुभव किया जाता है। दूसरा चरण है विपर्ययवृत्ति। विपर्ययवृत्ति में भ्रम की स्थिति को दूर करने का काम होता है। मन के भीतर बने पल रहे विपरीत ज्ञान में परिवर्तन ही विपर्ययवृत्ति है। तीसरा चरण है, विकल्प वृत्ति। विकल्प वृत्ति का तात्पर्य शब्द ज्ञान से हैं, जो वस्तु से रहित है। इसे कल्पना से अर्जित ज्ञान भी कहा जाता है लेकिन किसी वस्तु का कोई लेना-देना नहीं होता।
चौथा चरण है, निद्रावृत्ति। इसका अर्थ है, ज्ञानबोझ का अभाव होना। इस स्थिति में मन ज्ञान की अवस्था से दूर होता है और उसके भीतर तमस का अनुभव होता है। पांचवा चरण है स्मृतिवृत्ति। इसका अर्थ है जब मन पुरानी यादों को बार-बार याद करने लगता है। मन अतीत की घटनाओं या पलों में जीता है और उसे वही पल सुख का अनुभव देते हैं।
ये पांच वृत्तियां मन के सभी विकारों को हटाने की क्षमता रखती हैं और तनाव और बोझ से मुक्त करने में मदद करती हैं।
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