नई दिल्ली, 12 दिसंबर (khabarwala24)। भारत के लाइफ-इंश्योरेंस सेक्टर ने नवंबर में जोरदार वापसी की है, जिसमें नया बिजनेस प्रीमियम साल-दर-साल आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 31,119.6 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लाइफ-इंश्योरेंस इंडस्ट्री ने लगातार तीसरे महीने दोहरे अंकों (डबल डिजिट) की मासिक वृद्धि दर्ज की। यह उछाल मुख्य रूप से व्यक्तिगत नॉन-सिंगल पॉलिसियों में तेजी और व्यक्तिगत व समूह दोनों सेगमेंट में अच्छी प्रदर्शन की वजह से रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी में छूट के बाद बाजार में आए सकारात्मक बदलाव और पिछले साल के कम बेस इफेक्ट ने भी इस उछाल में मदद की, जिससे इंडस्ट्री की ग्रोथ बनी रही है।
एलआईसी ने व्यक्तिगत व समूह दोनों सेगमेंट में बेहतरीन प्रदर्शन करके मार्केट में अपना नेतृत्व बनाए रखा, जबकि प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों ने भी दोहरे अंकों की वृद्धि जारी रखी।
व्यक्तिगत नॉन-सिंगल प्रीमियम में अच्छी बढ़त देखने को मिली, जो कि लगातार आने वाले प्रीमियम की मजबूती को दिखाता है। ग्रुप बिजनेस को भी संस्थागत गतिविधियों में सुधार का फायदा मिला। हालांकि, पिछली बार के बेहद मजबूत बेस इफेक्ट के चलते इस साल समूह पॉलिसियों के रिन्युअल रेट में थोड़ी कमी देखी गई, लेकिन सेक्टर की कुल दिशा अभी भी पॉजिटिव है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में अब तक पहले वर्ष के प्रीमियम में लगातार शानदार बढ़ोतरी हुई है। इसका बड़ा कारण प्राइवेट कंपनियों का योगदान है।
नवंबर में लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के सिंगल-प्रीमियम बिजनेस में भी 29.4 प्रतिशत का उछाल देखने को मिला है, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 19.8 प्रतिशत घटा था। वहीं नॉन-सिंगल प्रीमियम में 14.3 प्रतिशत की सामान्य बढ़त हुई, क्योंकि ग्रुप रिन्युअल कम हो गया था, हालांकि जीएसटी कटौती के बाद लोग व्यक्तिगत नॉन-सिंगल प्रॉडक्ट्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। प्राइवेट कंपनियों ने व्यक्तिगत नॉन-सिंगल सेगमेंट में अपनी स्थिति मजबूत की, जबकि एलआईसी ने सिंगल-प्रीमियम बिजनेस में अपनी बढ़त बनाए रखी। व्यक्तिगत लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम 26.4 प्रतिशत बढ़े, जो पिछले साल केवल 7.7 प्रतिशत बढ़े थे।
केयरएज रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि नवंबर में भारत के लाइफ-इंश्योरेंस सेक्टर ने मजबूत वापसी की है। उन्होंने कहा कि पॉलिसियों की बढ़ती बिक्री और ग्राहकों की व्यापक भागीदारी यह दिखाती है कि इंडस्ट्री पिछले साल बदले गए सरेंडर वैल्यू नियमों के कारण हुई एजेंसी-लेवल की दिक्कतों से अब उबर चुकी है।
— khabarwala24
दुर्गेश बहादुर/एबीएस
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