ऋषिकेश, 14 फरवरी (khabarwala24)। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को सही ठहराते हुए अखिल भारतीय संत समिति, ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी गोपालाचार्य महाराज ने कहा कि शंकराचार्य पद सनातन धर्म का सबसे ऊंचा और सम्मानजनक पद है, जिस पर कोई भी व्यक्ति नहीं बैठ सकता।
उन्होंने कहा, “अखिल भारतीय संत समिति एक ऐसा संगठन है, जो देश के सभी खास संतों को देखता है। यह संगठन पिछले 30 सालों से देश के अलग-अलग मुद्दों पर काम कर रहा है। यह विषय अभी माघ मेले के संदर्भ में उठाया गया है और अब इसको लेकर समाज में बहुत असमंजस है। उत्तर प्रदेश के हमारे आदरणीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा है कि शंकराचार्य कोई भी नहीं हो सकता। यह बिल्कुल सही है। शंकराचार्य एक बहुत ही सम्मानजनक पद है और यह हमारे सनातन धर्म के सबसे ऊंचे पदों में से एक है। इस पर कोई नहीं बैठ सकता। शंकराचार्य पद सनातन धर्म का सबसे ऊंचा और सम्मानजनक पद है, जिस पर कोई भी व्यक्ति नहीं बैठ सकता।
स्वामी गोपालाचार्य ने माघ मेले के संदर्भ में उठे इस विवाद पर चिंता जाहिर करते हुए कहा, “जब शंकराचार्य जी गौहत्या जैसे मुद्दों पर सवाल उठाते हैं, तो उनके खिलाफ शंकराचार्य न होने का दावा करना संदेह पैदा करता है। समाज ने अब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के रूप में स्वीकार किया है, लेकिन उनकी स्थिति तय करना संतों का काम है। शंकराचार्य परंपरा से जुड़े अनुयायी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या वे इस पद के योग्य हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि योगी आदित्यनाथ भी एक संत हैं और सबसे ऊंचे पद पर बैठे हैं। उन्होंने कहा, “योगी आदित्यनाथ को मतभेद भुलाकर एकजुट होना चाहिए। वर्तमान में नास्तिक ताकतें सनातन धर्म का उल्लंघन कर रही हैं। ऐसे में इन मुद्दों पर विराम देकर नास्तिकों को एक साथ जवाब देना जरूरी है।”
दूसरी ओर, स्वामी निर्मल दास महाराज ने भी इस विषय पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री जी संवैधानिक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से पूरी तरह सही हैं। हर कोई शंकराचार्य नहीं बन सकता, लेकिन सरकार इस बात का निर्धारण नहीं कर सकती है कि कौन शंकराचार्य है। इसके लिए काशी विद्वित परिषद है।”
उन्होंने अखिलेश यादव सरकार के समय हुए लाठीचार्ज का भी जिक्र करते हुए कहा, “उस समय अखिलेश को लगा होगा कि कुछ गलत हो रहा है, इसलिए कार्रवाई हुई होगी, जो संविधान के अनुसार हो सकती है। लेकिन वर्तमान स्थिति पूरी तरह गलत है और ऐसा नहीं होना चाहिए था।”
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