उमरिया/नई दिल्ली, 2 फरवरी (khabarwala24)। पुणे के चर्चित पोर्शे हिट-एंड-रन मामले में पीड़ितों में से एक, अनिश अवधिया के परिजनों ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से तीन आरोपियों को जमानत दिए जाने पर निराशा जताई। परिजनों का कहना है कि ये आरोपी नाबालिगों को बचाने के लिए खून के सैंपल बदलने की साजिश में शामिल थे।
निश अवधिया के दादा आत्माराम अवधिया मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के निवासी हैं। उनका कहना है कि जांच में सामने आया है कि कार चला रहे नाबालिग आरोपी के पिता ने नाबालिगों को बचाने के लिए खून के सैंपल बदलवाने के बदले रिश्वत दी थी।
आत्माराम अवधिया ने khabarwala24 से कहा, “आज के फैसले से हम बहुत निराश हैं। हम सुप्रीम कोर्ट से आरोपियों की जमानत रद्द करने की मांग करेंगे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि नाबालिग आरोपी एक रियल एस्टेट कारोबारी का बेटा है, इसलिए नेता और वरिष्ठ अधिकारी मिलकर इस मामले को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं।
अनिश के पिता ओम अवधिया ने भी कहा कि उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत से न्याय की उम्मीद थी, लेकिन तीन आरोपियों को जमानत दिया जाना निराशाजनक है।
उन्होंने कहा, “हमें न्याय की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा लगता नहीं कि अब न्याय मिलेगा। इस मामले में राजनीतिक दबाव और पैसों की भूमिका है, इसलिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी।”
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पुणे के चर्चित पोर्शे हिट-एंड-रन मामले में नाबालिगों को बचाने के लिए खून के सैंपल बदलने की साजिश रचने के आरोप में तीन लोगों को जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि आरोपी लगभग 20 महीनों से जेल में हैं। इसके बाद अदालत ने आशीष सतीश मित्तल, आदित्य अविनाश सूद और अमर संतोष गायकवाड़ को ट्रायल कोर्ट की शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया।
इन तीनों पर आरोप है कि उन्होंने पोर्शे कार में मौजूद दो नाबालिगों (कार चला रहे नाबालिग के अलावा) के खून के सैंपल बदलने में भूमिका निभाई। हादसे के समय ये नाबालिग कथित तौर पर शराब के नशे में थे।
मित्तल को मुख्य आरोपी के पिता का दोस्त बताया गया है, जबकि सूद उस नाबालिग का पिता है, जो हादसे के समय कार की पिछली सीट पर बैठा था।
गायकवाड़ पर आरोप है कि उसने बिचौलिये की भूमिका निभाई और खून के सैंपल बदलवाने के लिए 3 लाख रुपए लिए।
यह मामला 19 मई 2024 का है, जब बिना नंबर प्लेट की तेज रफ्तार पोर्शे कार ने पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में अनिश अवधिया और अश्विनी कोस्टा की मौत हो गई थी, जो होटल से घर लौट रहे थे।
अश्विनी कोस्टा भी अनिश अवधिया के साथ सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करती थीं, और वह मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले की रहने वाली थीं।
जांच में सामने आया कि कार एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़का शराब के नशे में चला रहा था। उसके साथ कार में उसके दो नाबालिग दोस्त और एक ड्राइवर भी मौजूद थे।
पुलिस के अनुसार, नाबालिग ने हादसे से पहले दो अलग-अलग होटलों में शराब पी थी।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि शराब पीने की बात छिपाने के लिए नाबालिग का खून का सैंपल बदल दिया गया था।
जांच एजेंसियों का दावा है कि पुणे के ससून अस्पताल में डॉक्टरों ने नाबालिग का खून का सैंपल फेंक दिया और उसकी जगह उसकी मां का सैंपल भेज दिया।
इस कथित साजिश में नाबालिग के पिता, पुणे के कारोबारी विशाल अग्रवाल, उनकी पत्नी और अन्य लोग शामिल थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अस्पताल के कर्मचारियों को बिचौलियों के जरिए 3 लाख रुपए दिए गए, और वरिष्ठ मेडिकल अधिकारियों ने इस हेरफेर को अंजाम दिया, ताकि रिपोर्ट में शराब की मौजूदगी न दिखाई दे।
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