Khabarwala 24 News Lucknow: UP News उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही बेटियों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार की फ्लैगशिप ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ के तहत अब सिर्फ पढ़ाई में अव्वल आने वाली मेधावी छात्राओं को ही नहीं, बल्कि समाज के विशेष वर्ग से आने वाली निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं को भी मुफ्त स्कूटी प्रदान की जाएगी।शासन स्तर पर इस योजना की नियमावली को मंजूरी मिलने के बाद अब जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने सत्र 2025-26 के लिए प्रदेश के सभी सरकारी, राज्य और निजी विश्वविद्यालयों से पात्र छात्राओं का पूरा ब्योरा तलब किया है।
80% अंक वाली मेधावियों के साथ इन छात्राओं को मिलेगा सीधा लाभ (UP News)
सरकार ने योजना का दायरा बढ़ाते हुए यह सुनिश्चित किया है कि आर्थिक या शारीरिक रूप से कमजोर छात्राएं शिक्षा के सफर में पीछे न छूटें:
- मेधावी छात्राएं: शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक (Graduation) के अंतिम वर्ष में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण होने वाली छात्राएं।
- निराश्रित छात्राएं: ऐसी छात्राएं जिनके माता या पिता में से किसी एक की मृत्यु हो चुकी है और परिवार में भरण-पोषण व पढ़ाई का खर्च उठाने वाला कोई अन्य सहारा उपलब्ध नहीं है।
- दिव्यांग छात्राएं: मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी, सेरेब्रल पाल्सी, हीमोफिलिया और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों से प्रभावित छात्राएं। इसके लिए मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) द्वारा न्यूनतम 80 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाण पत्र होना अनिवार्य किया गया है।
विशेष शर्त: दिव्यांग छात्राओं की दृष्टि और मानसिक स्थिति पूरी तरह सामान्य होनी चाहिए, जिससे वे मोटराइज्ड व्हीकल/स्कूटी का संचालन सुरक्षित रूप से कर सकें।
₹400 करोड़ का बजट (UP News)
50,000 से अधिक छात्राओं को फायदा योजना का नामरानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजनाप्रस्तावित बजट₹400 करोड़ (आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त आवंटन होगा)लाभार्थियों का लक्ष्य50,000 से अधिक छात्राएंखरीद की प्रक्रियापारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के तहत जिला स्तर पर होगी खरीदसंबद्ध विभागउच्च शिक्षा विभाग एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग
विश्वविद्यालयों के ढीले रवैये पर विभाग सख्त (UP News)
योजना को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव सर्वेश कुमार सिंह ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और परीक्षा नियंत्रकों को पत्र भेजकर डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि राज्य के आधे विश्वविद्यालयों ने ही अभी तक अपनी पात्र छात्राओं का आंकड़ा भेजा है। इस लापरवाही पर शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऑनलाइन गूगल फॉर्म जारी किया है और सभी संस्थानों को अविलंब डेटा अपलोड करने के अंतिम निर्देश दिए हैं।
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