Khabarwala24 News: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के इस्तेमाल पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी ट्रांजैक्शन शुल्क लगाए जाने की खबरों को लेकर देश भर में नई बहस छिड़ गई है। आम डिजिटल यूजर्स से लेकर छोटे दुकानदारों के बीच इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी कि क्या ऑनलाइन भुगतान करना अब महंगा हो जाएगा। हालांकि, अब इस मामले पर पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और वित्त मंत्रालय की ओर से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई है। जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, यूपीआई भुगतान पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा और इसका प्रभाव न तो आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और न ही छोटे किराना व्यापारियों पर।
भुगतान एवं निपटान प्रणाली संशोधन विधेयक के बाद उठी थीं अटकलें (UPI Charge Clarification)
हाल ही में संसद में प्रस्तुत भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2026 के बाद सोशल मीडिया और व्यापारिक संगठनों के बीच यह कयास लगाए जाने लगे थे कि सरकार डिजिटल पेमेंट्स पर शुल्क लागू करने की तैयारी में है। आलोचकों का दावा था कि यदि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया गया, तो छोटे व्यापारी ऑनलाइन भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं या फिर इस शुल्क का अप्रत्यक्ष बोझ आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।
इन अटकलों को खारिज करते हुए इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) के तहत कार्यरत ‘पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया’ (PCI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर विस्तृत जानकारी साझा की। पीसीआई ने स्पष्ट किया कि 2016 में शुरुआत के बाद से ही यूपीआई आम नागरिकों के लिए मुफ़्त रहा है और भविष्य में भी किसी भी कंज्यूमर से कोई लेनदेन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
There has been considerable discussion around UPI and merchant charges. Here are the facts behind the conversation what it means for consumers, merchants, and India's digital payment ecosystem.
1. Will I have to pay to use UPI?
No. UPI has always been free for consumers since…— PCI – Payments Council of India (@PCIUpdates) August 7, 2026
छोटे दुकानदारों, ठेले वालों और किराना स्टोर्स को मिलेगी पूरी राहत
व्यापारिक वर्ग की चिंताओं को दूर करते हुए पीसीआई ने साफ किया कि छोटे से छोटे व्यवसायों के लिए डिजिटल लेन-देन को सुगम और सुलभ बनाना ही यूपीआई की सफलता का मूल आधार रहा है।
परिषद ने आधिकारिक तौर पर कहा कि किराना दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, आइसक्रीम विक्रेताओं, मिठाई की दुकानों और अन्य छोटे व्यापारियों पर एमडीआर (MDR) चुकाने की कोई अनिवार्यता लागू नहीं होगी। वे बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के पूर्ववत यूपीआई के माध्यम से डिजिटल भुगतान स्वीकार करना जारी रख सकते हैं।
आखिर क्या होता है मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह सेवा शुल्क होता है जो कोई व्यापारी डिजिटल लेन-देन की प्रक्रिया को पूरा करने के एवज में संबंधित बैंकों या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को चुकाता है।
डिजिटल पेमेंट क्षेत्र के विशेषज्ञों और समर्थकों का तर्क रहा है कि वित्तीय संस्थानों को मजबूत पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने, साइबर सुरक्षा ढाँचे को अपडेट करने और तकनीकी इनोवेशन के लिए फंड की आवश्यकता होती है। हालांकि, पीसीआई ने दोहराया है कि जहां कहीं भी मर्चेंट सर्विस चार्ज लागू होते हैं, वे विशुद्ध रूप से बड़े व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं के बीच का व्यावसायिक समझौता होते हैं। इसका आम उपभोक्ता या छोटे व्यापारी से कोई संबंध नहीं होता।
वित्त मंत्री का रुख: ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा कोई अतिरिक्त बोझ
इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री ने भी यूपीआई शुल्कों से जुड़ी चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि फिलहाल आम यूजर्स पर ऐसा कोई शुल्क थोपने का कोई विचार नहीं है। यदि भविष्य में किसी स्तर पर डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कोई वाणिज्यिक तंत्र बनता भी है, तब भी यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आम जनता और छोटे कारोबारियों पर इसका कोई प्रतिकूल वित्तीय प्रभाव न पड़े।
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