Khabarwala 24 News Lucknow: UP MLC Election उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर होने वाली चुनावी जंग बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब तक 5 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम साफ कर चुकी है, लेकिन बाकी बची 6 सीटों पर पेंच फंसा हुआ है। इन खाली सीटों पर टिकट हासिल करने के लिए दावेदारों ने लखनऊ के प्रदेश मुख्यालय से लेकर दिल्ली के केंद्रीय नेताओं के चौखट तक लॉबिंग तेज कर दी है। राजनीतिक गलियारों की मानें तो अगले कुछ दिनों में पार्टी आलाकमान इन सीटों पर अंतिम मुहर लगा सकता है।
शिक्षक संगठनों से गठजोड़ और सियासी पेंच (UP MLC Election)
बाकी बची सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा में देरी की सबसे बड़ी वजह शिक्षक संगठनों का राजनीतिक समीकरण है। राज्य का एक रसूखदार शिक्षक गुट इस चुनाव में भाजपा के साथ रणनीतिक तालमेल की कोशिश में है। हालांकि, गणित तब उलझ जाता है जब इसी संगठन के प्रत्याशी कई सीटों पर भाजपा के खिलाफ चुनावी समर में उतर चुके हैं।
संगठन के शीर्ष नेता झांसी-इलाहाबाद स्नातक सीट से भाजपा का समर्थन पाने की कोशिश में हैं, लेकिन पार्टी का स्थानीय कैडर इस मांग को आसानी से स्वीकार करने के मूड में नहीं है। वहीं, इसी गुट के एक प्रभावशाली एमएलसी का भाजपा पाले में आना लगभग तय माना जा रहा है। पिछले चुनाव में भाजपा ने उनके खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारा था, और इस बार उनके सीधे भगवा झंडे तले चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं।
विवादित रिकॉर्ड बने गले की फांस (UP MLC)
पार्टी में शामिल होकर टिकट हथियाने की होड़ में एक और शिक्षक एमएलसी का नाम चर्चा में है। उन्होंने दिल्ली के एक कद्दावर नेता के जरिए अपनी वकालत कराई है, मगर उत्तर प्रदेश का प्रदेश नेतृत्व उनके नाम पर राजी नहीं दिख रहा।
बताया जा रहा है कि उनके विरोधी गुटों ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में स्थित उनके शिक्षण संस्थानों से जुड़ी वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की फाइलें लखनऊ से दिल्ली तक पहुँचा दी हैं। विवादों से घिरे होने के कारण पार्टी नेतृत्व फिलहाल कोई भी राजनीतिक जोखिम लेने से कतरा रहा है।
कोर कमेटी में नहीं बन पाई सहमति (UP MLC)
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुई प्रदेश कोर कमेटी की मैराथन बैठक में इन बची हुई सीटों पर लंबा मंथन हुआ था। बैठक में पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं के अलावा कुछ बाहरी चेहरों पर भी विचार किया गया। हालांकि, कुछ नामों पर नेताओं के बीच आम सहमति नहीं बन सकी, जिसके चलते फैसला टालना पड़ा। अब केंद्रीय चुनाव समिति के साथ अंतिम दौर की बातचीत के बाद ही प्रत्याशियों की अंतिम सूची सामने आएगी।
संगठन में बड़े फेरबदल की पटकथा तैयार (UP MLC)
एमएलसी चुनाव की सरगर्मी के बीच भाजपा अपने सांगठनिक ढांचे में भी बड़ा ऑपरेशन करने की तैयारी में है। 2027 के चुनावी मिशन को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और मोर्चा इकाइयों को नए सिरे से गढ़ा जा रहा है:
- पुराने चेहरों की रवानगी: 10 साल या लगातार दो-तीन कार्यकाल से पदों पर काबिज पदाधिकारियों की जगह नए कार्यकर्ताओं को मौका देने की रणनीति है।
- मोर्चों में नई ऊर्जा: भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) समेत सभी सहायक संगठनों में जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाएगी।
- मिशन 2027 पर नजर: संगठन में इस फेरबदल का मुख्य उद्देश्य चुनावी तंत्र को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाना है।
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