ऋषि बोधोत्सव में वेद-संस्कृति का संदेश: आर्य समाज हापुड़ में वैदिक यज्ञ और भजन

हापुड़ (khabarwala24 News)। आर्य समाज मंदिर, हापुड़ में चल रहे ऋषि बोधोत्सव में वेदों, संस्कारों और भारतीय संस्कृति का संदेश जोर-शोर से फैल रहा है। आज के प्रातःकालीन सत्र में वैदिक यज्ञ के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। मुख्य वक्ता आचार्य योगेश भारद्वाज ने आत्मचिंतन, वेदों के महत्व […]

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हापुड़ (khabarwala24 News)। आर्य समाज मंदिर, हापुड़ में चल रहे ऋषि बोधोत्सव में वेदों, संस्कारों और भारतीय संस्कृति का संदेश जोर-शोर से फैल रहा है। आज के प्रातःकालीन सत्र में वैदिक यज्ञ के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। मुख्य वक्ता आचार्य योगेश भारद्वाज ने आत्मचिंतन, वेदों के महत्व और संस्कृत भाषा के अध्ययन पर जोर दिया। शाम को महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती का विशेष कार्यक्रम होगा। यह उत्सव 15 फरवरी 2026 तक रोजाना दो सत्रों में जारी रहेगा, जिसमें सभी को परिवार सहित शामिल होने का न्योता है।

वैदिक यज्ञ से शुरू हुआ दिन

आर्य समाज मंदिर, हापुड़ में ऋषि बोधोत्सव के तहत आज सुबह का सत्र वैदिक यज्ञ से शुरू हुआ। यज्ञ ब्रह्मा धर्माचार्य श्री धर्मेन्द्र शास्त्री जी के मार्गदर्शन में किया गया। यज्ञमान के रूप में श्री चमन सिंह शिशोदिया, श्री सुनील शर्मा, श्री विवेक गर्ग, श्री आकाश आर्य, श्री राकेश गुप्ता और श्री अजय गोयल अपनी पत्नियों के साथ मौजूद रहे। यज्ञ के बाद सभी ने श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लिया। पूरा माहौल भक्ति से भर गया था।

भजनों ने छुआ दिल

यज्ञ के बाद शामली से आए यंत्रवादक श्री सुभाष आर्य जी ने भजन सुनाए। उन्होंने “भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है” और “प्रभु को न भूल, नशे में न डोल” जैसे भजन गाए, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। इसके बाद हिसार (हरियाणा) से आईं बहन कल्याणी आर्या जी ने वैदिक चिंतन वाले भजन प्रस्तुत किए, जैसे “ईश्वर को भज प्राणी, जो चाहे निज कल्याण”, “मानव जीवन मिलना, तू मान सुखद संयोग” और “धन्य है महर्षि, वेद वीणा बजाकर गया”। उन्होंने कहा कि महापुरुष जीवन को दुःखों का सागर बताते हैं, लेकिन महर्षि दयानंद ने सकारात्मक नजरिया दिया कि सुख ज्यादा हैं, बस मनुष्य दुःखों को बढ़ा-चढ़ाकर देखता है और सुख भूल जाता है।

मुख्य वक्ता आचार्य योगेश भारद्वाज जी का ओजस्वी संदेश

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय प्रखर वक्ता आचार्य योगेश भारद्वाज जी ने अपने भाषण में आत्मचिंतन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य सुख में आसक्त रहता है, दुःख में नहीं। शरीर हर पल बदल रहा है और कमजोर हो रहा है। ‘मैं कौन हूँ’ जैसे सवाल जीवन का आधार हैं। जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय अवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने आत्मज्ञान के लिए मुमुक्षुत्व की जरूरत बताई। आचार्य जी ने वेदों को सभी सत्य विद्याओं का मूल बताया और उनका अध्ययन-अध्यापन को परम धर्म कहा।

संस्कृति बचाने के लिए संस्कृत भाषा पढ़ने पर बल दिया। उन्होंने साझा भोजन, साझा सुरक्षा और साझा उद्देश्य की भावना अपनाने की बात कही। शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति के लिए निरंतर मेहनत करने और दूसरों की सफलता में अपनी खुशी मानने की सलाह दी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर महर्षि दयानंद के विचारों का प्रचार नहीं किया तो आर्य समाज घर-घर नहीं पहुंच पाएगा। इसलिए वैदिक विचारधारा फैलाने का संकल्प लेने की अपील की।

शाम का कार्यक्रम और आमंत्रण

आज शाम महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती मनाई जाएगी। सभी से समय पर पहुंचकर फायदा उठाने की गुजारिश है। ऋषि बोधोत्सव 15 फरवरी 2026 तक चलेगा—सुबह 7 से 10 बजे और शाम 4 से 6:30 बजे तक। मंदिर पदाधिकारियों और कार्यकारिणी ने हापुड़ वासियों से परिवार सहित आने का निमंत्रण दिया है। पूरा वातावरण वैदिक ऊर्जा, भक्ति और चिंतन से भरा रहा।

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Sheetal Kumar Nehra
Sheetal Kumar Nehrahttps://www.khabarwala24.com/
मेरा नाम Sheetal Kumar Nehra है। मैं एक सॉफ्टवेयर डेवलपर और कंटेंट राइटर हूं , मुझे मीडिया और समाचार सामग्री में 17 वर्षों से अधिक का विभिन्न संस्थानों (अमरउजाला, पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स आदि ) में कंटेंट रइटिंग का अनुभव है । मुझे वेबसाइट डिजाइन करने, वेब एप्लिकेशन विकसित करने और सत्यापित और विश्वसनीय आउटलेट से प्राप्त वर्तमान घटनाओं पर लिखना बेहद पसंद है।

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