नई दिल्ली, 17 जनवरी (khabarwala24)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रपति भवन के एक कार्यक्रम में नॉर्थ-ईस्ट का पारंपरिक पटका न पहनने को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस मुद्दे पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे सामंती अहंकार और सुल्तानी सोच का प्रतीक बताया है।
समाचार एजेंसी khabarwala24 से मंगलवार को खास बातचीत में मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी की असली समस्या उनकी सोच है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व आज भी कुर्सी के अहंकार में कैद है और जनता की भावना को समझने में पूरी तरह विफल हो चुका है। नकवी ने कहा कि राष्ट्रपति भवन की घटना में आपने इस जिद्दी रवैये का नतीजा देखा। कांग्रेस और राहुल गांधी सामंती अहंकार और सुल्तान जैसी सोच से टूट चुके हैं।
कांग्रेस की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए नकवी ने कहा कि पार्टी लगातार ‘हिट-एंड-रन’ की राजनीति, गुंडागर्दी और अराजकता के रास्ते पर चल रही है, जो अंततः उसे अपने ही विनाश की ओर ले जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी कारण कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है।
गणतंत्र दिवस परेड में राहुल गांधी की सीट को लेकर हुए विवाद पर भी नकवी ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि अब ये कहते हैं कि हमें फ्रंट में सीट नहीं मिली, हमें बैकबेंचर बना दिया गया। अरे भाई, कौन कहां बैठेगा यह जनता तय करती है। जनता चाहे तो आगे बैठाएगी, नहीं तो पीछे। लेकिन कांग्रेस की सोच और सनक आज भी कुर्सी की सनक में ही कैद है।
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के मौजूदा स्वरूप पर हमला बोलते हुए कहा कि जो पार्टी कभी आम लोगों की आवाज हुआ करती थी, वह अब धीरे-धीरे एक एलीट क्लब में बदलती जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज फैमिली फोटो फ्रेम में सिमट गई है और पार्टी पूरी तरह परिवारवाद और चंद लोगों के इर्द-गिर्द घूम रही है। नकवी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस की हालत यह है कि एग्जिट गेट पर भारी भीड़ है, लोग लगातार बाहर जा रहे हैं, लेकिन एंट्री गेट पर सन्नाटा है, शायद ही कोई अंदर आ रहा हो।
इस बीच चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की घोषणा पर भी मुख्तार अब्बास नकवी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पूजा और आस्था के स्थल पर्यटन स्थल नहीं होते। नकवी ने कहा कि पूजा और आस्था की जगहें पूजा के लिए होती हैं, वे टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं हैं। अगर कुछ लोगों को इस पर आपत्ति है और वे वहां पर्यटन के उद्देश्य से जाना चाहते हैं, तो उन्हें यह समझना चाहिए कि वहां किस तरह के नियम लागू होते हैं और उन स्थलों की परंपराएं और व्यवस्थाएं क्या हैं।
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