अमेरिकी कांग्रेस सदस्यों की चेतावनी : एआई चिप निर्यात भविष्य की सैन्य और आर्थिक ताकत तय करेगा

वाशिंगटन, 20 जनवरी (khabarwala24)। अमेरिका के सांसदों ने चेतावनी दी है कि एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप्स के निर्यात से जुड़े फैसले भविष्य की सैन्य और आर्थिक ताकत तय कर सकते हैं। इसी कारण संसद में यह बहस तेज हो गई है कि इस तकनीक को सामान्य व्यापारिक सामान की तरह देखा जाए या रणनीतिक हथियारों […]

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now

वाशिंगटन, 20 जनवरी (khabarwala24)। अमेरिका के सांसदों ने चेतावनी दी है कि एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप्स के निर्यात से जुड़े फैसले भविष्य की सैन्य और आर्थिक ताकत तय कर सकते हैं। इसी कारण संसद में यह बहस तेज हो गई है कि इस तकनीक को सामान्य व्यापारिक सामान की तरह देखा जाए या रणनीतिक हथियारों की तरह कड़े नियंत्रण में रखा जाए।

पिछले हफ्ते हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की सुनवाई में, दोनों पार्टियों के सदस्यों ने कहा कि एआई चिप्स अब युद्ध, खुफिया कार्यों और देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में बहुत अहम भूमिका निभा रही हैं। इसलिए इनके निर्यात पर संसद की वैसी ही निगरानी जरूरी है जैसी हथियारों की बिक्री पर होती है।

- Advertisement -

कमेटी के चेयरमैन कांग्रेसी ब्रायन मास्ट ने कहा कि एडवांस्ड एआई सिस्टम सिविलियन इस्तेमाल से बहुत आगे निकल गए हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई एक्सपोर्ट अमेरिका के मिलिट्री फायदे को बदलता है, तो कांग्रेस की भूमिका होती है।”

मास्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पहले से ही मिलिट्री कमांड और कंट्रोल, इंटेलिजेंस एनालिसिस, निगरानी, ​​साइबर ऑपरेशंस और न्यूक्लियर मॉडर्नाइजेशन का आधार है। उन्होंने कहा, “एआई का दबदबा यह तय कर सकता है कि कौन पहले देखता है, कौन पहले फैसला करता है, और कौन पहले हमला करता है।”

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैट पॉटिंगर ने चेतावनी दी कि उन्नत चिप्स को साधारण व्यापारिक उत्पाद समझना एक बड़ी रणनीतिक भूल हो सकती है। उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र का उदाहरण दिया, जहां कभी पश्चिमी कंपनियों का दबदबा था, लेकिन आयातित तकनीक के सहारे चीनी कंपनियां आगे निकल गईं। उनका कहना था कि उन्नत एआई चिप्स की बिक्री से खुली प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि विरोधी देशों की सैन्य ताकत मजबूत होगी।

- Advertisement -

पॉटिंगर ने चीन की “सैन्य–नागरिक एकीकरण” नीति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां नागरिक और सैन्य उपयोग में फर्क करना लगभग असंभव है। उन्होंने कहा, “ऐसा कुछ नहीं है कि एक हिस्से में सिविलियन इस्तेमाल हो और दूसरे में मिलिट्री इस्तेमाल।”

पूर्व प्रशासनिक अधिकारी जॉन फाइनर ने कहा कि एडवांस्ड चिप्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग टूल्स पर एक्सपोर्ट कंट्रोल दुश्मनों की प्रगति को धीमा करने वाले कुछ प्रभावी उपायों में से एक रहे हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इसके लिए लगातार लागू करने की ज़रूरत है।

फाइनर ने कहा, “एक्सपोर्ट कंट्रोल कोई एक बार का समाधान नहीं है। इसके लिए लगातार सतर्कता, बार-बार एडजस्टमेंट और, जरूरत पड़ने पर, सख्ती की जरूरत होती है।”

अर्थशास्त्री ओरेन कैस ने कहा कि एडवांस्ड कंप्यूटिंग पावर तक पहुंच राष्ट्रीय ताकत का एक निर्णायक पैमाना बन गया है। उनके अनुसार एआई युग में यह आर्थिक विकास के साथ-साथ नई सैन्य क्षमताओं के लिए भी जरूरी है। कैस ने चेतावनी दी कि लिमिटेड चिप सप्लाई को विदेशी खरीदारों को देने से अमेरिकी इंडस्ट्री भी कमजोर हो सकती है।

कई सदस्यों ने तर्क दिया कि एडवांस्ड एआई चिप्स को अब आम एक्सपोर्ट की तरह नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, एडवांस्ड चिप्स निश्चित रूप से सैन्य बढ़त को बदल देती हैं। कुल मिलाकर, जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युद्ध, खुफिया तंत्र और अर्थव्यवस्था का केंद्र बनती जा रही है, अमेरिकी संसद यह विचार कर रही है कि उन्नत एआई चिप्स को सामान्य व्यापार नहीं, बल्कि हथियार नियंत्रण जैसे कड़े नियमों के दायरे में रखा जाना चाहिए।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

-Advertisement-

Related News

-Advertisement-

Breaking News