इस्लामाबाद, 21 दिसंबर (khabarwala24)। तोशाखाना-2 मामले में कोर्ट ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बेगम को 17-17 साल की जेल की सजा सुनाई। कोर्ट के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। साथ ही पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ पार्टी के चीफ इमरान इस्लामाबाद हाईकोर्ट में कोर्ट के फैसले को चुनौती देने की योजना बना रहे हैं।
पाकिस्तानी मीडिया डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पीटीआई चीफ के पास जेल में अपने सोशल मीडिया हैंडल का एक्सेस नहीं है। ऐसे में उनके अकाउंट पर इमरान और उनके वकील के बीच हुई बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा गया, “मैंने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को सड़क पर आंदोलन की तैयारी करने का मैसेज भेजा है। पूरे देश को अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना होगा।”
इमरान खान के हवाले से पोस्ट में कहा गया कि इस केस में उन्हें मिली सजा कोई हैरानी की बात नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी लीगल टीम से इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने को कहा है। उन्होंने कहा, “पिछले तीन सालों के बेबुनियाद फैसलों और सजाओं की तरह तोशखाना-2 का फैसला भी मेरे लिए कोई नई बात नहीं है। यह फैसला जज ने बिना किसी सबूत और कानूनी जरूरतों को पूरा किए जल्दबाजी में दिया था।”
डॉन के अनुसार इमरान खान ने आरोप लगाया है कि सुनवाई के दौरान उनकी लीगल टीम को सुना भी नहीं गया। पीटीआई प्रमुख ने कहा कि इंसाफ लॉयर्स फोरम और व्यापक कानूनी समुदाय के लिए यह जरूरी है कि वे कानून के शासन और संविधान की बहाली के लिए खुलकर आगे आएं। न्याय के बिना आर्थिक विकास संभव नहीं हो सकता।
पीटीआई की ओर से जारी बयान में इमरान खान और उनकी पत्नी को सुनाई गई सजा को खुले तौर पर असंवैधानिक और गैर-कानूनी बताया गया। इसके साथ ही इसे राजनीतिक बदले का सबसे गंभीर उदाहरण करार दिया।
पीटीआई नेताओं ने आरोप लगाया कि यह सजा सिर्फ इमरान खान की जेल की सजा बढ़ाने और डरपोक सरकार को कुछ समय के लिए राहत देने की कोशिश थी। पाकिस्तान में कानून का राज खत्म हो गया है, और एक दब्बू न्यायपालिका के जरिए राजनीतिक बदला सिस्टमैटिक तरीके से लिया जा रहा है।
पीटीआई के वरिष्ठ नेता असद कैसर और सेक्रेटरी जनरल सलमान अकरम राजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की, जिसमें राजा ने आरोप लगाया कि केस सिर्फ प्रॉमिसरी नोट्स पर आधारित था और इसमें भरोसेमंद सबूतों की कमी थी। उन्होंने कहा, “उनके पास उस आदमी के अलावा कोई गवाह नहीं है जिसे पीटीआई फाउंडर खुद सामने लाए थे।”
उन्होंने केस में एक गवाह के बयान का साफ तौर पर जिक्र करते हुए कहा, “एक आदमी खड़ा होता है और कहता है कि उस पर दबाव डाला गया था और आप उसे सबूत मान लेते हैं।”
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