वाशिंगटन, 13 मार्च (khabarwala24)। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को नौसैनिक सुरक्षा (एस्कॉर्ट) देने के लिए पूरी तरह तैयार है। संभावनाएं हैं कि इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
व्हाइट हाउस की डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी अन्ना केली ने khabarwala24 को बताया, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगर जरूरी लगा, तो होर्मुज से अमेरिकी नौसेना के एस्कॉर्ट उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हमारी सेना ने 20 से अधिक निष्क्रिय माइन-बिछाने वाली नावों को नष्ट कर दिया है और आगे भी नष्ट की जाएंगी।”
व्हाइट हाउस की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब वाशिंगटन इस संकरे जलमार्ग से जहाजों को सुरक्षित करने के उपायों पर विचार कर रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जैसे ही हालात सुरक्षित मार्ग की अनुमति देंगे, संभवतः एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ अमेरिकी नौसेना इस जलडमरूमध्य से जहाजों को एस्कॉर्ट करना शुरू कर सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बेसेंट ने कहा कि अमेरिका पहले से ही ऐसी आपात स्थितियों के लिए योजना बना रहा था।
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि जैसे ही सैन्य रूप से संभव होगा, अमेरिकी नौसेना एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ जहाजों को इस जलडमरूमध्य से एस्कॉर्ट करेगी।” बेसेंट ने आगे कहा, “हमने महीनों और हफ्तों से इस स्थिति के लिए अलग-अलग परिदृश्यों का विश्लेषण किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि समुद्री सुरक्षा अभियानों की तैयारी पहले से ही चल रही थी।”
खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर हुए हमलों और बढ़ती सैन्य झड़पों के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने वाली शिपिंग गतिविधियां काफी धीमी हो गई हैं। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से तेल और गैस का बड़ा व्यापार होता है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया के हवाले से जारी समुद्री अलर्ट के अनुसार, दुबई से लगभग 50 समुद्री मील उत्तर-पश्चिम में एक मालवाहक जहाज पर ‘अज्ञात मिसाइल’ से हमला हुआ। इससे जहाज में आग लग गई और चालक दल को जहाज खाली करना पड़ा। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने बताया कि चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं और जांच चल रही है।
अधिकारियों ने इस क्षेत्र में काम कर रहे जहाजों को सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने की सलाह दी है।
इस व्यवधान ने भारत के लिए चिंताएं भी बढ़ाई हैं, जो इस जलमार्ग से गुजरने वाली ऊर्जा शिपमेंट पर बहुत अधिक निर्भर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बात की और इस क्षेत्र में बिगड़ते हालात पर चर्चा की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, “क्षेत्र में गंभीर स्थिति पर चर्चा करने के लिए मैंने ईरानी राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन से बातचीत की।”
उन्होंने कहा, “तनाव बढ़ने, आम नागरिकों की जान जाने और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने पर मैंने गहरी चिंता जताई। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, साथ ही सामान और ऊर्जा के बिना किसी रुकावट के आवागमन की जरूरत भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं। मैंने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और बातचीत व कूटनीति का आग्रह किया।”
भारतीय अधिकारियों ने बताया कि पिछले महीने संघर्ष शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह पहला सीधा संपर्क था। नई दिल्ली ने हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में अपनी कूटनीतिक पहुंच बढ़ाई है। पीएम मोदी ने ओमान, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, इजरायल और कतर समेत कई क्षेत्रीय नेताओं से बात की है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ समुद्री सुरक्षा पर चर्चा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “भारतीय विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हुई है। आखिरी बातचीत में शिपिंग सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।”
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