नेपाल के पूर्व पीएम ओली ने चुनाव में करारी हार स्वीकार की, आरसीपी ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत

काठमांडू, 12 मार्च (khabarwala24)। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने कहा कि 5 मार्च को हुए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के चुनावों में उन्हें और उनकी पार्टी को मिली करारी हार के बाद उन्होंने लोगों के जनादेश को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया है।बता दें, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) या सीपीएन […]

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now

काठमांडू, 12 मार्च (khabarwala24)। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने कहा कि 5 मार्च को हुए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के चुनावों में उन्हें और उनकी पार्टी को मिली करारी हार के बाद उन्होंने लोगों के जनादेश को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया है।

बता दें, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) या सीपीएन (यूएमएल) के चेयरपर्सन ओली को पूर्वी नेपाल के झापा-5 चुनाव क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेन शाह ने करारी शिकस्त दी। झापा-5 यूएमएल का पारंपरिक गढ़ है, ऐसे में ये नतीजा कई लोगों के लिए सोचा भी नहीं जा सकता था।

काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के पूर्व मेयर शाह ने ओली के खिलाफ 68,348 वोटों से जीत हासिल की। यह नेपाल के संसदीय इतिहास में किसी भी उम्मीदवार को मिले सबसे ज्यादा वोट हैं। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री को नए उम्मीदवार के हाथों बुरी तरह हार का सामना करते हुए सिर्फ 18,734 वोट मिले।

उनकी पार्टी 275 सदस्यों वाली हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में फर्स्ट पास्ट द पोस्ट (एफपीटीपी) सिस्टम के तहत उपलब्ध 165 सीटों में से सिर्फ नौ सीटें जीतकर तीसरे स्थान पर रही। 110 सीटें प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन इलेक्टोरल सिस्टम से भरी जाती हैं।

साढ़े तीन साल पुरानी आरएसपी के अध्यक्ष रबी लामिछाने और पीएम उम्मीदवार शाह हैं। आरएसपी ने एफपीटीपी सिस्टम के तहत 125 सीटों पर जीत हासिल की। ​​पार्टी ने प्रोपोर्शनल इलेक्टोरल सिस्टम के तहत वोट शेयर में भी काफी बढ़त हासिल की है और पारंपरिक राजनीतिक दल सीपीएन (यूएमएल), नेपाली कांग्रेस और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी हार गईं।

पूर्व पीएम ओली ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा, “मैं इस चुनाव में वह परिणाम हासिल नहीं कर सका जिसकी मुझे उम्मीद थी। हमारी पार्टी भी वह परिणाम हासिल नहीं कर सकी जिसकी हमने उम्मीद की थी। लोकतंत्र में, आखिरी फैसला लोगों का होता है और उस फैसले का सम्मान करना मेरी पार्टी और मेरा फर्ज है। मैं लोगों के फैसले को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं।”

उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम उनकी पार्टी के पक्ष में नहीं आया। उन्होंने आगे कहा, “हालांकि, लोगों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और सेवा की भावना जरा भी कमजोर नहीं हुई है।”

ओली ने कहा कि यह उनकी पार्टी के लिए मुश्किल समय है, लेकिन पार्टी लोगों के बीच रहेगी, उनके लिए काम करती रहेगी और भरोसे के रिश्ते को मजबूत करने के लिए आगे बढ़ेगी।

ओली समेत पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों के बड़े नेताओं को चुनावों में बुरी हार का सामना करना पड़ा क्योंकि समय के साथ जनता में उनके प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा था। यही कारण है कि सितंबर 2025 में जेन-जी प्रोटेस्ट देखने को मिला, जिसके बाद केपी ओली की सरकार को इस्तीफा देना पड़ा।

जेन-जी आंदोलन ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया, जिसमें 77 लोगों की जान चली गई थी और लगभग 84 बिलियन से ज्यादा नेपाली मुद्रा तक की सरकारी और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ था।

इसके बाद सुशीला कार्की के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी, जिसने इस साल 5 मार्च को चुनाव कराए। इससे नई पार्टी आरएसपी सत्ता में आई।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related News

Breaking News