Saharanpur News: PNB की तिजोरी में निकला 17 करोड़ का नकली नोटों का पहाड़! 3 बैंक मैनेजर सस्पेंड, सफाईकर्मी गिरफ्तार

Saharanpur PNB Fake Currency: सहारनपुर पीएनबी करेंसी चेस्ट से 17 करोड़ रुपये के नकली नोट बरामद। 3 बैंक मैनेजरों पर FIR दर्ज, सस्पेंड।

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Khabarwala24 Saharanpur News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से देश के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े जाली नोट छांटने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बैंक की तिजोरी में मौजूद नकली नोटों का आंकड़ा शुरुआती 7.40 करोड़ रुपये से बढ़कर अब करीब 17 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है। इस भीषण अनियमितता में 3 सीनियर बैंक मैनेजरों और एक हाउसकीपर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच तेज कर दी गई है।

जयपुर चेस्ट भेजी गई खेप से खुला करोड़ों के फर्जीवड़े का राज (Saharanpur News)

बैंकिंग तंत्र की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करने वाली इस पूरी घटना का खुलासा तब हुआ, जब सहारनपुर के घंटाघर स्थित सोफिया मार्केट स्थित पीएनबी (PNB) की करेंसी चेस्ट से 11.50 करोड़ रुपये की बड़ी नकदी 5 अगस्त को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जयपुर स्थित करेंसी चेस्ट भेजी गई थी।

जब आरबीआई जयपुर चेस्ट में अधिकारियों द्वारा नकदी की गहन गिनती की गई, तो नोटों के बंडलों में 4 लाख 30 हजार 900 रुपये कम पाए गए। इस अंतर की सूचना तुरंत पीएनबी के मेरठ अंचल कार्यालय को दी गई। मामला संदेहास्पद लगने पर बैंक प्रबंधन ने मुख्य प्रबंधक व जांच अधिकारी अरुण कुमार चौबे को तत्काल सहारनपुर पहुंचकर पूरी वस्तुस्थिति का पता लगाने के आदेश दिए।

CCTV फुटेज में कैद हुआ पार्ट-टाइम सफाईकर्मी का संदिग्ध कारनामा (Saharanpur News)

सहारनपुर पहुंचकर जब जांच अधिकारी ने करेंसी चेस्ट के रिकॉर्ड और सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल शुरू की, तो पार्ट-टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार की गतिविधियां संदिग्ध नजर आईं। विशाल को करेंसी चेस्ट के भीतर नोटों की गड्डियों को करीने से रखने और व्यवस्थित करने का काम सौंपा गया था।

सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर देखा गया कि विशाल ने नोटों के बंडलों में से रुपये निकाले थे। चोरी की पुष्टि होने पर बैंक प्रशासन ने उसे तत्काल प्रभाव से नौकरी से हटा दिया और उसके खिलाफ स्थानीय थाने में रुपये चुराने का आपराधिक मामला दर्ज कराया। हालांकि, जांच एजेंसियां अब इस पहलू की भी गहराई से छानबीन कर रही हैं कि हाउसकीपर द्वारा गड्डियों से नोट निकालने और तिजोरी में जमा करीब 17 करोड़ की जाली करेंसी के बीच क्या कोई सीधा सांठगांठ है या ये दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं।

विस्तृत ऑडिट में सामने आई तिजोरी में भरी 17 करोड़ की जाली करेंसी (Saharanpur News)

जयपुर चेस्ट में मिले नोटों के अंतर और हाउसकीपर की संदिग्ध भूमिका के बाद बैंक अधिकारियों का माथा ठनका। इसके बाद 9 अगस्त से सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट का बड़े पैमाने पर ऑडिट और हर नोट के सत्यापन का काम शुरू किया गया।

जैसे-जैसे मशीनों और विशेषज्ञों द्वारा नोटों की जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे तिजोरी के अंदर से नकली नोटों के बंडल निकलने शुरू हो गए। शुरुआत में जाली नोटों की कुल कीमत लगभग 7.40 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन जैसे-जैसे तिजोरी में रखे बंडलों की गिनती का काम आगे बढ़ता गया, यह आंकड़ा चौंकाने वाले तरीके से 17 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया। बैंक सूत्रों का कहना है कि चूंकि अभी सभी नोटों की 100 प्रतिशत स्कैनिंग पूरी नहीं हुई है, इसलिए अंतिम आंकड़ा इससे भी ज्यादा हो सकता है।

3 बैंक प्रबंधकों पर गिरी गाज, संतोषजनक जवाब न मिलने पर सस्पेंड (Saharanpur News)

जाली नोटों का इतना बड़ा पहाड़ मिलने के बाद बैंक के आला अधिकारियों ने करेंसी चेस्ट के संचालन और निगरानी से जुड़े सीनियर अफसरों से जवाब-तलब किया।

जांच के घेरे में आए वरिष्ठ मंडल प्रबंधक रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील कुमार और हरियाणा के यमुनानगर-जगाधरी स्थित करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार से स्पष्टीकरण मांगा गया। जांच अधिकारी के मुताबिक, तीनों ही सीनियर अधिकारी जाली नोटों की मौजूदगी और सुरक्षा में हुई इतनी बड़ी चूक पर कोई संतोषजनक या तार्किक जवाब नहीं दे सके।

तत्पश्चात, जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर 29 अगस्त की शाम को सहारनपुर के कोतवाली सदर बाजार में तीनों बैंक मैनेजरों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया। साथ ही पीएनबी प्रबंधन ने तीनों अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है।

यक्ष प्रश्न: बैंक की आधुनिक मशीनें क्यों नहीं पकड़ सकीं नकली नोट? (Saharanpur News)

17 करोड़ रुपये मूल्य के नकली नोटों का बैंक की मुख्य करेंसी चेस्ट तक बिना किसी बाधा के पहुंच जाना पूरे देश के बैंकिंग सिस्टम पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

हर बैंक चेस्ट में नोट जमा करने से पहले उन्हें हाई-टेक करेंसी सॉर्टिंग मशीनों और अल्ट्रावायलेट डिटेक्टरों से गुजारा जाता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि:

  1. क्या यह करोड़ों की रकम बिना किसी मशीन चेकिंग के सीधे तिजोरी में रख दी गई थी?
  2. अगर नोटों की चेकिंग हुई थी, तो क्या बैंक में लगे नकली नोट पकड़ने वाले उपकरण खराब थे या उन्हें जानबूझकर बायपास किया गया?
  3. क्या किसी बड़े संगठित गिरोह ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर असली नोट निकालकर वहां नकली नोटों की गड्डियां फिट कर दीं?

इन 10 प्रमुख बिंदुओं पर टिकी है जांच एजेंसियों की सुई (Saharanpur News)

पुलिस प्रशासन और बैंक की आंतरिक जांच टीमें अब इस बहुचर्चित मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं का ब्योरा जुटाया जा रहा है:

  1. आगमन की तारीख: इतनी बड़ी मात्रा में नकदी किस-किस तारीख को किस-किस सोर्स से चेस्ट में पहुंची थी?
  2. सत्यापन अधिकारी: उस वक्त काउंटर पर तैनात किस कर्मचारी/अधिकारी ने इन नोटों को रिसेप्ट दिया था?
  3. मशीन रिकॉर्ड: चेस्ट में लगी किन-किन सॉर्टिंग मशीनों से इन नोटों को स्कैन किया गया था?
  4. सील और बंडल कोड: नकली नोटों के बंडलों पर लगी पर्चियां, सील और टैग किसके नाम से जारी थे?
  5. कैश मूवमेंट रजिस्टर: हाल के महीनों में किस-किस शाखा से कितना कैश आया और कितना भेजा गया?
  6. सीसीटीवी का बैकअप: पिछले कई महीनों का सीसीटीवी फुटेज खंगाला जा रहा है कि चेस्ट में कौन-कौन अनधिकृत रूप से आता-जाता था।
  7. अदर बैंक लिंकेज: क्या यह फर्जी नकदी किसी अन्य बैंक शाखा या फिर पड़ोसी राज्यों (जैसे हरियाणा या उत्तराखंड) के चेस्ट से ट्रांसफर होकर आई थी?

मौके पर पहुंचे डीआईजी, डीएम और एसएसपी; एसआईटी का गठन संभव (Saharanpur News)

सहारनपुर पीएनबी में इतने बड़े पैमाने पर जाली करेंसी का खुलासा होने के बाद राज्य शासन तक हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी रेंज अभिषेक सिंह, जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने खुद सोफिया मार्केट स्थित बैंक परिसर में पहुंचकर चेस्ट रूम का गहन निरीक्षण किया।

अधिकारियों ने बैंक के डबल-लॉक रूम, सुरक्षा मानकों, रिकॉर्ड रूम और कैश ट्रांसफर रजिस्टर की बारीकी से जांच की। डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि प्रकरण बेहद संवेदनशील और गंभीर है। मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

अगर जांच के तार दूसरे जिलों, राज्यों या किसी अंतरराज्यीय नकली नोट छापने वाले नेटवर्क से जुड़ते हैं, तो इस केस की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी सौंपी जा सकती है।

बैंकिंग चैनल में घुसपैठ का बड़ा खतरा (Saharanpur News)

बैंक की तिजोरी तक 17 करोड़ की फर्जी करेंसी का पहुंचना केवल एक शाखा की चोरी या धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि इतनी भारी तादाद में करेंसी बिना किसी उच्चस्तरीय मिलीभगत के चेस्ट तक नहीं आ सकती। फिलहाल पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें बैंक के एक-एक दस्तावेज, सीसीटीवी डेटा और आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को खंगाल रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में कई और बड़े नामों के सामने आने की संभावना है।

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