Khabarwala 24 News Lucknow: UP Panchayat Election उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने के कारण प्रशासक की जिम्मेदारी संभाल रहे निवर्तमान ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। पंचायती राज विभाग ने इन प्रशासकों के कार्य संचालन और वित्तीय अधिकारों को लेकर विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है। इस फैसले से अब प्रदेश भर के ब्लॉकों और जिला पंचायतों में ठप पड़े विकास कार्यों में तेजी आएगी और पुराने बकाए भुगतानों का रास्ता भी पूरी तरह साफ हो जाएगा।
नई गाइडलाइन से मिलेगी राहत (UP Panchayat Election)
अभी तक दैनिक कार्यों के निस्तारण और पूर्व में कराए गए निर्माण कार्यों के भुगतान को लेकर स्पष्ट नियम न होने की वजह से जिला स्तर पर जिलाधिकारी कार्यालयों में सैकड़ों फाइलें अटकी पड़ी थीं। नई गाइडलाइन आने के बाद अब निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष रूटीन और आवश्यक नीतिगत कार्यों का निस्तारण बिना किसी प्रशासनिक रुकावट के कर सकेंगे। इससे पहले शासन द्वारा ग्राम पंचायतों में प्रशासक बने ग्राम प्रधानों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
भौतिक और तकनीकी सत्यापन के बाद होगा पुराने कार्यों का भुगतान (UP Panchayat Election)
पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, निवर्तमान ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का 5 वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व जो भी विकास व निर्माण कार्य कराए गए थे, उनका पहले भौतिक और तकनीकी सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पूर्व की भांति उनके बकाए का भुगतान कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त ब्लॉकों और जिला पंचायतों में कार्यरत संविदा व नियमित कर्मचारियों के वेतन एवं अन्य रूटीन भुगतानों को भी प्रशासक के रूप में मंजूरी दी जा सकेगी।
बोर्ड से पास कार्यों को डीएम की अनुमति से कराने की छूट (UP Panchayat Election)
गाइडलाइन में यह स्पष्ट किया गया है कि ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाए जाने संबंधी आदेश जारी होने से पूर्व, यदि बोर्ड की बैठक में किसी निर्माण कार्य का प्रस्ताव पास हो चुका था लेकिन निविदा (टेंडर) या निर्माण प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी थी, तो उन कार्यों को अब शुरू कराया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए संबंधित ब्लॉक प्रमुखों को जिलाधिकारी (DM) से औपचारिक अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।
शासकीय बैठकों पर रोक, विशेष स्थिति में मंडलायुक्त देंगे मंजूरी (UP Panchayat Election)
नई क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों का विधिवत गठन होने तक प्रशासकों को किसी भी प्रकार की शासकीय या विभागीय बैठक करने का अधिकार नहीं होगा। हालांकि, यदि कोई ऐसा महत्वपूर्ण कार्य है जो किसी नीति, नियम, न्यायालय के आदेश या अन्य किसी अपरिहार्य स्थिति के कारण बेहद जरूरी है, तो ब्लॉक प्रमुख जिलाधिकारी की अनुमति लेकर उसे पूरा करा सकेंगे।
इसी तरह, जिला पंचायत अध्यक्षों को ऐसे विशेष कार्यों के लिए संबंधित मंडलायुक्त से पूर्व अनुमति लेनी होगी। मंडलायुक्त इस संबंध में अधिकतम 15 दिनों के भीतर अपना निर्णय देकर जिलाधिकारी और संबंधित जिला पंचायत को सूचित करेंगे।
दागी प्रमुखों की जगह SDM संभालेंगे कमान (UP Panchayat Election)
गाइडलाइन में यह भी साफ किया गया है कि जिन ब्लॉक प्रमुखों के खिलाफ किसी तरह के गंभीर आरोप में अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई की गई है, उन्हें प्रशासक के अधिकार नहीं दिए जाएंगे। ऐसी जगहों पर संबंधित तहसील के उप जिलाधिकारी (SDM) प्रशासक के रूप में कार्यभार संभालेंगे।
गौरतलब है कि जिला पंचायत अध्यक्षों का 5 साल का कार्यकाल 11 जुलाई को तथा ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त हो गया था। कार्यकाल पूरा होने के बाद ही सरकार ने विकास कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के लिए इन्हें प्रशासक नियुक्त किया था। नई गाइडलाइन से पूरे प्रदेश में ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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