देहरादून, 28 अगस्त (khabarwala24)। उत्तराखंड में भाजपा सरकार ने पर्यटन ही नहीं, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार किए हैं। गुरुवार को उच्च शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनने की दिशा में उत्तराखंड तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मंत्री धन सिंह रावत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मेरे राज्य में लगभग 37 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं और हमारे पास 22,000 स्कूल हैं। वर्तमान में हमारे राज्य में 37 विश्वविद्यालय हैं और इस साल यह संख्या 40 तक पहुंच जाएगी।
उन्होंने कहा कि अब विदेशी छात्र भी उत्तराखंड की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार का प्रमाण है। मंत्री धन सिंह रावत ने कहा, मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमारे राज्य का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) भारत में तमिलनाडु के बाद दूसरे स्थान पर है और अगले साल तक हमारा लक्ष्य तमिलनाडु को भी पीछे छोड़ना है।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा सुधार के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इसके तहत राज्य के विश्वविद्यालयों को वैश्विक रैंकिंग में लाना, नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करना और कक्षा 9वीं से व्यावसायिक शिक्षा की शुरुआत की जाएगी, ताकि छात्र शिक्षा के साथ रोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ सकें। उन्होंने बताया कि इस साल 700 स्कूलों में व्यावसायिक कक्षाएं शुरू की जा रही हैं। साथ ही, 1200 इंटर कॉलेजों में स्मार्ट क्लास और हर स्कूल में कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य किया जा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करते हुए मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि इस क्षेत्र में भी क्रांति लाने का काम किया जा रहा है। राज्य में एक व्यापक स्वास्थ्य सेवा अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत 225 स्थानों पर रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। सभाओं में भी स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे और हर गांव में डॉक्टर स्वयं जाकर निशुल्क जांच करके दवा देंगे। उन्होंने बताया कि करीब 4 लाख युवाओं का हेल्थ वॉलंटियर रजिस्ट्रेशन भी किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां 400 एमबीबीएस के छात्रों को पीजी की पढ़ाई राज्य सरकार अपने खर्चे पर करा रही है। इन विशेषज्ञ डॉक्टरों को 5 साल तक राज्य में सेवा देना अनिवार्य होगा, जिससे पहाड़ और दूरदराज के क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
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Source : IANS
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