सोनम वांगचुक की हिरासत के आधार बताने में देरी पर कपिल सिब्बल ने उठाए सवाल, 12 जनवरी को अगली सुनवाई

नई दिल्ली, 8 जनवरी (khabarwala24)। सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की याचिका पर सुनवाई हुई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी।सोनम वांगचुक की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कानून […]

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नई दिल्ली, 8 जनवरी (khabarwala24)। सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की याचिका पर सुनवाई हुई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी।

सोनम वांगचुक की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कानून में यह साफ है कि अगर हिरासत के सभी आधार नहीं बताए जाते हैं तो इससे हिरासत का आदेश रद्द हो जाएगा।

सिब्बल ने कहा कि सोनम को हिरासत में लेने के आधार 28 दिन के बाद बताए गए, जो कानूनी समय-सीमा का साफ उल्लंघन है। उन्हें 29 सितंबर को डिटेंशन ऑर्डर और हिरासत के अधूरे आधार दिए गए थे। घटना के सबूत वाले चार वीडियो 29 तारीख को नहीं दिए गए थे। पुलिस ने वीडियो के लिंक दिए और हिरासत में लेने के आधार बताए।

उन्होंने आगे कहा कि 5 अक्टूबर को एक लैपटॉप दिया गया, लेकिन 29 तारीख को दी गई पेनड्राइव में वे 4 वीडियो नहीं थे। कानून कहता है कि अगर भरोसेमंद दस्तावेज जिसके आधार पर हिरासत ली गई है, अगर उन्हें सप्लाई नहीं किया जाता है, तो हिरासत का आदेश रद्द हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में ये बात कही है।

कपिल सिब्बल ने कोर्ट को सोनम वांगचुक के भाषण का वीडियो दिखाते हुए कहा कि आपको याद होगा कि गांधी ने भी ऐसा ही किया था। जब चौरी चौरा कांड के बाद हिंसा हुई थी, तो उन्होंने भी बिल्कुल वैसा ही किया था। सोनम वांगचुक के भाषण का लहजा किसी भी तरह से राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है।

बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गीतांजलि जे अंगमो को अपनी याचिका में संशोधन करने की अनुमति दी थी और केंद्र, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और जेल अधिकारियों को अपने अतिरिक्त जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 अक्टूबर को पारित आदेश में कहा, “याचिकाकर्ता को याचिका में संशोधन करने और एक सप्ताह के भीतर संशोधित प्रति दाखिल करने की अनुमति है। संशोधित प्रतिउत्तर उसके बाद 10 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए। यदि कोई प्रत्युत्तर हो, तो वह भी उसके बाद एक सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए।”

संशोधित याचिका में अंगमो ने तर्क दिया है कि हिरासत का आदेश बिना सोचे-समझे, यांत्रिक रूप से पारित किया गया था, और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत अनिवार्य प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया गया था।

उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि अधिकारियों ने जल्दबाजी में कार्रवाई की और समय पर और सार्थक तरीके से हिरासत के पर्याप्त आधार प्रदान करने में विफल रहे, जिससे वांगचुक को प्रभावी प्रतिनिधित्व करने का अवसर नहीं मिला।

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