नई दिल्ली, 4 जनवरी (khabarwala24)। स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल होने जा रहा है। तटरक्षक बल का यह आधुनिक पोत प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका तो निभाएगा ही, लेकिन इसके साथ ही यह अत्याधुनिक हथियारों से भी लैस है। वहीं, इस पोत में कई उन्नत तकनीकें व सेंसर भी लगाए गए हैं। यह जहाज इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम और ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। इसमें उच्च क्षमता वाली बाहरी अग्निशमन प्रणाली भी मौजूद है।
भारतीय तटरक्षक बल के अनुसार, यह पोत गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित है। प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 5 जनवरी को गोवा में तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल करेंगे। 114.5 मीटर लंबा और लगभग 4,200 टन वजनी यह शक्तिशाली पोत 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है। ‘समुद्र प्रताप’ की गति 22 नॉट से अधिक है। ये क्षमताएं इसे लंबी दूरी के परिचालन के लिए बेहद सक्षम बनाती हैं।
नए पोत के शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता में वृद्धि होगी। वहीं, अग्निशमन क्षमता और समुद्री सुरक्षा व संरक्षा में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। यह पोत तेल रिसाव नियंत्रण, समुद्री आपदाओं में त्वरित प्रतिक्रिया, और संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह दो पोतों की परियोजना का पहला पोत है और 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह जहाज तेल रिसाव का पता लगाने में सक्षम है। साथ ही यह गाढ़े तेल से प्रदूषक निकालने के काम को भी अंजाम दे सकता है। यह जहाज समुद्र में दूषित पानी से तेल अलग करने और समुद्र में व्यापक प्रदूषण नियंत्रण अभियान चलाने में भी सक्षम है।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ‘समुद्र प्रताप’ के निर्माण ने आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के लक्ष्य को भी मजबूत किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘समुद्र प्रताप’ भारतीय तटरक्षक का एक बड़ा पोत है। इसे विशेष रूप से समुद्री प्रदूषण नियंत्रण और आपदा प्रतिक्रिया के लिए तैयार किया गया है। यह पोत भारतीय तटरक्षक का पहला जहाज है जिसमें डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम (डीपी-1) लगा है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए इसमें अत्याधुनिक उपकरण हैं।
ऑयल फिंगर प्रिंटिंग मशीन, रासायनिक पदार्थों का पता लगाने वाला जाइरो-स्टेबलाइज्ड डिटेक्टर और प्रदूषण विश्लेषण की प्रयोगशाला सुविधा इस जहाज में शामिल हैं। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक ‘समुद्र प्रताप’ के शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।
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