नई दिल्ली, 15 जनवरी (khabarwala24)। कांग्रेस नेता उदित राज ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी की टिप्पणी पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि ये सेकुलर देश है, लेकिन कट्टरपंथी विचार के लोग दोनों तरफ हैं। वे हिजाब और घूंघट वाली औरतों की बात पर झगड़ा कराते हैं।
अरशद मदनी ने अपने एक पोस्ट में कांग्रेस पर आरोप लगाया कि अगर पार्टी ने 77 साल पहले सांप्रदायिकता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया होता तो वह सत्ता से बाहर नहीं होती। मदनी ने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने धर्म के आधार पर नफरत की राजनीति के विरोध में एक लचकदार नीति अपनाई और सांप्रदायिक शक्तियों के साथ नरमी बरती।
इस पर उदित राज ने अपने जवाब में कहा, “बड़ी बातें न करें, कट्टरपंथी विचार के लोग दोनों तरफ हैं। ये लोग (मुस्लिम समुदाय) भी कट्टरपंथी बातें करते हैं कि महिला को क्या पहनना चाहिए, क्या नहीं पहनना चाहिए। एक व्यक्ति कहता है कि हिजाब वाली औरत को प्रधानमंत्री बनना है, मुसलमानों को पिटवाने का काम कर रहे हैं। तो इधर तो कहेंगे कि घूंघट वाली औरत, तो ये खुद झगड़ा लगाते हैं और उसी में इनका फायदा होता है।”
समाचार एजेंसी khabarwala24 से बातचीत में उदित राज ने कहा, “एक महिला प्रधानमंत्री बने अलग बात है, लेकिन हिजाब वाली औरत और घूंघट वाली औरत के नाम पर नहीं। धर्म के आधार पर कहना गलत है।”
उन्होंने भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, “सरदार पटेल अगर जी रह गए होते तो शायद आरएसएस खत्म हो गया होता। नेहरू जी बहुत ही बड़े हृदय के थे और सभी को साथ लेकर चलना चाहते थे। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भी मंत्रिमंडल में रखा था। सरदार पटेल ने संघ पर प्रतिबंध तो किया था, मगर उनकी नीति अगर काम कर गई होती, तो आरएसएस और भाजपा नहीं रहते।”
कांग्रेस नेता ने उत्तराखंड के घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने की उठ रही मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह समाज और देश को तोड़ने की बात है। भगवान अगर एक है और कण-कण में है।
उदित राज ने अपने बयान में कहा, “सभी हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, सिख और जैन इसी धरती पर रह रहे हैं। ये नैरेटिव जानबूझकर बनाया जा रहा है। अभी तो कह रहे हैं कि गैर-हिंदू, अब हिंदुओं में भी देखना पड़ेगा कि दलित जा सकता है या नहीं। कल कहेंगे दलित नहीं आएगा, यादव नहीं आएगा।”
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