नई दिल्ली, 8 जनवरी (khabarwala24)। सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई जारी रखेगा। कोर्ट इस मामले को और गहराई से जांचेगा और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नियमों का पालन करने की स्थिति भी देखेगा।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश भर में कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी और नगर निगम अधिकारियों और स्थानीय निकायों द्वारा एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता पर चिंता जताई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच, जो सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों के मैनेजमेंट पर स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी, ने कहा कि बच्चों और बड़ों दोनों को कुत्ते काट रहे हैं और लगातार लापरवाही के कारण लोगों की जान जा रही है।
जस्टिस नाथ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हमें पता है कि ये सब हो रहा है। बच्चों और बड़ों को कुत्ते काट रहे हैं, लोग मर रहे हैं। पिछले 20 दिनों में ही दो जज जानवरों से जुड़े सड़क हादसों में शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर आवारा जानवरों की मौजूदगी सिर्फ काटने की समस्या नहीं है, बल्कि यह हादसों का भी एक बड़ा कारण है।
सीनियर एडवोकेट और एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने जस्टिस नाथ की बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों के बाद, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बनाया है और लगभग 1,400 किलोमीटर के हाईवे के खतरनाक हिस्सों की पहचान की है।
हालांकि, उन्होंने बताया कि इसे लागू करने के लिए राज्य सरकारों द्वारा मिलकर काम करने की जरूरत होगी, जिसमें शेल्टर बनाना और एबीसी केंद्रों के लिए मैनपावर शामिल है। कोर्ट को यह भी बताया कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब सहित कई बड़े राज्यों ने अभी तक कंप्लायंस एफिडेविट दाखिल नहीं किए हैं।
जस्टिस नाथ की बेंच ने चेतावनी दी कि सुप्रीम कोर्ट नियमों का पालन न करने पर सख्त रुख अपनाएगा। कोर्ट ने कहा कि जो राज्य जवाब नहीं देंगे, उनके साथ हम सख्ती से पेश आएंगे।
पशु कल्याण समूहों का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि नसबंदी और टीकाकरण के जरिए आबादी को कंट्रोल करना ही एकमात्र टिकाऊ समाधान है। उन्होंने चेतावनी दी कि कुत्तों को उनके इलाकों से अंधाधुंध हटाने से समस्या और बिगड़ सकती है।
अधिकारियों की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुझाव दिया कि गेटेड कम्युनिटी के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन को वोटिंग से यह तय करने की अनुमति दी जानी चाहिए कि उनके परिसर में आवारा जानवरों को अनुमति दी जाए या नहीं। उन्होंने कहा कि जानवरों के प्रति दया निवासियों के अधिकारों और सुरक्षा से ऊपर नहीं हो सकती।
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