इंदौर, 2 जनवरी (khabarwala24)। मध्य प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में शहर के भागीरथपुरा इलाके में चल रहे दूषित पानी के संकट पर एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की।
लगभग 15 पेज की रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि दूषित पानी पीने से चार लोगों की मौत हो गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लगभग 200 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 35 इंटेंसिव केयर यूनिट में हैं।
यह मामला, जो इंदौर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट एडवोकेट रितेश इनानी द्वारा दायर एक जनहित याचिका थी, जस्टिस द्वारकाधीश बंसल और जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की डिवीजन बेंच के सामने लिस्ट किया गया था।
याचिकाकर्ता रितेश इनानी ने सरकार की दलील को आखिरी समय में जल्दबाजी में किया गया काम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी रिपोर्ट जमा कर दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, सप्लाई किए गए दूषित पानी पीने से केवल चार लोगों की मौत हुई है। लगभग 15 पेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि 200 लोग अस्पतालों में हैं और 35 अलग-अलग अस्पतालों के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में हैं। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय की है।
इस मामले में एक हस्तक्षेपकर्ता ने कोर्ट से गलत जानकारी को रोकने के लिए इस मुद्दे पर मीडिया प्रकाशनों पर रोक लगाने का आग्रह किया। हालांकि, बेंच ने इस अनुरोध पर कोई टिप्पणी नहीं की।
आधिकारिक तौर पर चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। लेकिन, रिपोर्ट्स के अनुसार मरने वालों की संख्या 15 तक हो सकती है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी के बीच टैंकरों से साफ पानी की सप्लाई जारी रखें और मेडिकल केयर दें।
लगातार आठ सालों तक भारत का सबसे साफ शहर रहा इंदौर, एक गंभीर पब्लिक हेल्थ संकट से जूझ रहा है, क्योंकि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पीने के पानी से कई मौतें हुई हैं और बड़े पैमाने पर बीमारियां फैली हैं। एक शौचालय के पास पाइपलाइन लीक होने के कारण नगर निगम के पानी की सप्लाई में सीवेज मिलने से गंभीर दस्त, उल्टी और डिहाइड्रेशन का प्रकोप फैल गया है।
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