नई दिल्ली, 29 दिसंबर (khabarwala24)। चिकित्सा के स्तर को आगे ले जाने के लिए केंद्रीय आयुष मंत्रालय लगातार सराहनीय कदम उठा रहा है और अब मंत्रालय ने आयुर्वेदिक, सिद्ध और यूनानी औषधियों की गुणवत्ता जांच के लिए कुल 108 लैब खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि 108 लैब को औषधि नियम, 1945 के प्रावधानों के तहत लाइसेंस दिया जाएगा।
नई लैब खोलने के अलावा, 34 स्टेट ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरी को इंफ्रास्ट्रक्चर और उनकी काम करने की क्षमता को मजबूत करने के लिए सपोर्ट दिया गया है। सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद साइंसेज के तीन रीजनल रिसर्च इंस्टीट्यूशन को भी ड्रग्स रूल्स 1945 के रूल 160E के तहत मंजूरी दी गई है।
आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने अपने बयान में कहा कि “आयुर्वेदिक, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं के लिए फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम को केंद्रीय क्षेत्र योजना और आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना के तहत लागू किया गया है, जो देशभर में स्थापित राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस केंद्र, 5 मध्यवर्ती फार्माकोविजिलेंस केंद्र और 97 परिधीय फार्माकोविजिलेंस केंद्र के माध्यम से काम करेगा।
उन्होंने कहा, “इन केंद्रों को भ्रामक विज्ञापनों की निगरानी करने और संबंधित राज्य नियामक प्राधिकरणों को इसकी रिपोर्ट करने का दायित्व भी सौंपा गया है, ताकि दवाओं को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जा सके। अब तक देशभर में 3,533 जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा चुका है।”
इससे पहले भी आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने आयुर्वेद के प्रचार और प्रसार को बढ़ाने और जागरूकता लाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में स्वास्थ्य शिक्षा पाठ्यक्रम में आयुर्वेद को शामिल करना लक्ष्य रखा था। इस कार्य को आगे बढ़ाते हुए पाठ्यक्रम मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है और जल्द ही उसे अनिवार्य भी किया जाएगा।
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